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शकील समर's Discussions (135)

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"ख़्वाहिशों की सजी मण्डियाँ देखियेअब तो ख़्वाबों का भी कारखाना हुआएक झटके में तूने हि…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"मैंने लूटी है दौलत तेरे हुस्न से जब कभी भी तेरा मुस्कुराना हुआ | इस शेअर ने तो दिल…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"दिली दाद कुबूलें इस शानदार गजल के लिएछटपटाता रहा आँख में रात भरख़्वाब देखे कोई अब ज़मा…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"फूल रख कर किताबों में देना उसे छोडि़ये, अब उसे भी ज़माना हुआ। अंदर तक उतर गया यह शे…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"वो भी क्या दिन थे जब साथ थे वो मेरे अब तो हसरत ये क़िस्सा पुराना हुआ लाजवाब मकता हसर…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"ज़ुल्फ़ उसने जो खोली, घटा छा गई मुस्कुराई तो मौसम सुहाना हुआ ये जानलेवा हो गया आदरणीय…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"जो इशारे पे बिछता रहा आपकेआज दिल वो फलाना-चिलाना हुआ इस शेअर के काफिये पर कुर्बान जा…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"तरही गजल___________________________खुल के जब भी मेरा मुस्कुराना हुआतब से दुशमन ये सा…"

शकील समर replied Dec 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"ज़रा नाज़ुकी से तू पेश आ, है ये चोट दिल पे नई नई, न तू ठेस दिल को लगा मेरे, कोई ज़ख्म…"

शकील समर replied Nov 29, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

"आभार आपका।"

शकील समर replied Nov 29, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 41 (Now Closed)

697 Nov 30, 2013
Reply by Saurabh Pandey

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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Sushil Sarna posted a blog post

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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

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