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"जब से आप सबको पढने लगी हूँ । चीजों को समझने लगी हूँ । तो स्वाभाविक ही है कि खुद को क…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"तोल तोल कर बडे ही सुंदर दोहे गढे हम तो पढकर मगन हुए ।बहुत खूब लिखा है आपने आदरणीय सु…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"बेहद गहराई से परखते है परखने की चीज़ को ..... लाजवाब है यह भी"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"वाह !!!! बडी ही अद्भुत व्याख्या की है आपने आदरणीय मिथिलेश जी आपने आदरणीया प्रतिभा जी…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"बेहद शानदार प्रस्तुति आदरणीया डा. प्राची जी , इस नवगीत में प्रश्नों का पुछना पल पल म…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"लीला है तराजू की, कैसी अपरम्पार याही से सोना तुले, याही से भंगार  ......वाह !!!! क्य…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"डंडी तराजू मुक्त हुआ रात गई सब बात गई मन पलड़ा उन्मुक्त हुआ खेला पलड़ा लुका छिपी डंड…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"हर एक दोहे में समाज के चलन का प्रतिबिंब अंकित किया है आपने आदरणीय लक्ष्मण जरीवाला जी…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"गहन चिंतन में डूबोता हुआ आपका परमात्मा से पुकार ... रूप कितने समाज के कितने हुए असहा…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"निज सुख साधन तोलकर,खुश होते हैं आप| कौन तराजू तोलता,दूजे का संताप|......बेहद ही उम्द…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
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