For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Discussions (5,004)

Discussions Replied To (2641) Replies Latest Activity

"आदरणीय सौरभ भाईजी  दूल्हों की मंडी सजी, सभी युवक अनमोल। ........  अनमोल  पिता की नज़र…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीया नीरजजी  रचना को पसंद करने के लिए हृदय से धन्यवाद , आभार ।"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीय मिथिलेश भाईजी ,  हार्दिक धन्यवाद , ...  प्रतिक्रिया का इंतजार है। "

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीया प्राचीजी गर्व था जिन लब्धियों पर, सोच पर -सब नकारीं मूँछ तुमने ऐंठ कर, फूल स…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी सब धर्मों का सार है, सत्य बड़ा अनमोल, पंथ धर्म मजहब सभी, एक तुला…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीया राजेशजी  जिसे तुला ना तोलती,नेह भाव अनमोल| पल भर में उस भाव को ,नैना लेते तो…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीया प्रतिभाजी  कुछ मेरी नादानियाँ  थीं , आदरणीया प्रतिभाजी  कुछ थे , तुम्हारे अह…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीया नीरज शर्माजी इक में सच्चाई , मानवता, ऑनेस्टी का मेल। दूजे में नेता को रक्खो…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीय मिथिलेश  भाई  भला जिनको नहीं मालूम है इन्साफ के माने नवाजे हाथ क्यों उनके खुद…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"प्रिय गिरिराज  तराजू तो निर्जीव है, क्या समझे  न्याय अन्याय। डंडी मारने वाले लोग, कर…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
3 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service