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धर्मेन्द्र शर्मा's Discussions (2,538)

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"एक बार फिर से बरसात के पानी से सराबोर रचना शारदा जी. आशा है ये रचना पहली बार सुधि पा…"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"आदरणीय लता जी, बहुत सुन्दर रचना. //कहीं अब भी सूनी आँख निहारे आते जाते बादल.. कहीं…"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"आदरणीय डॉ. दानी जी. हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया "

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"आपका बहुत बहुत धन्यवाद तपन भाई"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"आपका बहुत बहुत धन्यवाद शन्नो जी."

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"बहुत सुन्दर रचना शन्नो जी. आनंद आ गया पढ़ कर."

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"वाह अरुण भाई, क्या ग़ज़ल कही आपने. बरखा बहार के अनेकों पहलुओं को छू लिया. //भींगे हुए…"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"आदरणीय मोईन जी, आपकी ग़ज़ल ने तो महफ़िल में रंग जमा दिया. एक एक शेर एक दूसरे शेर से बेह…"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"सभी कुछ याद है मुझे! उस बरसात के बाद....... मिट्टी की भीनी सी खुशबु में अचानक खोना…"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 9, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"भाई रवि जी, आपकी रचना न केवल हम सबको रिमझिम में भिगो गयी, बल्कि एक गुरुत्व भी लिए हु…"

धर्मेन्द्र शर्मा replied Jul 8, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
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"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
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तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
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