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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Discussions (5,004)

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"कलियुग भी द्वापर काल लगे होली में रंग गुलाल लगे, सतरंगी सबके गाल लगे। होली में रंग…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Mar 15, 2025 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-172

13 Mar 16, 2025
Reply by Sushil Sarna

"इस प्रस्तुति पर  हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील  भाईजी|"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jan 12, 2025 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-170

11 Jan 12, 2025
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"विषय पर सार्थक दोहावली, हार्दिक बधाई, आदरणीय लक्ष्मण भाईजी|"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Jan 12, 2025 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-170

11 Jan 12, 2025
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"आदरणीय हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए|   कम्प्यूटर में समस्या है इसलिए मोबाइल के म…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Dec 15, 2024 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-169

30 Dec 16, 2024
Reply by Chetan Prakash

"आदरणीय हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए|   कम्प्यूटर में समस्या है इसलिए मोबाइल के म…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Dec 15, 2024 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-169

30 Dec 16, 2024
Reply by Chetan Prakash

"आदरणीया हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए|   कम्प्यूटर में समस्या है इसलिए मोबाइल के…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Dec 15, 2024 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-169

30 Dec 16, 2024
Reply by Chetan Prakash

"आदरणीय हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए|   कम्प्यूटर में समस्या है इसलिए मोबाइल के म…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Dec 15, 2024 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-169

30 Dec 16, 2024
Reply by Chetan Prakash

"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया "

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Dec 15, 2024 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-169

30 Dec 16, 2024
Reply by Chetan Prakash

"निर्धन या धनवान हो, इच्छा सबकी अनंत है | जब तक साँसें चल रहीं, होता इसका न अंत है||…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Dec 14, 2024 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-169

30 Dec 16, 2024
Reply by Chetan Prakash

"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी एक आम व्यक्ति की मजबूरियों का सुंदर वर्णन किया है इस होली  गीत…"

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied Mar 12, 2023 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-149

19 Mar 12, 2023
Reply by अजय गुप्ता 'अजेय

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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