For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI's Discussions (33)

Discussions Replied To (33) Replies Latest Activity

"उठाता है वो जब चश्मे करम ऐसा भी होता है। सभी बनते हैं मेरे हमकदम ऐसा भी होता है ।।…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Mar 26, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129

330 Mar 27, 2021
Reply by Samar kabeer

"रह वो ऐसी दिखा गया है मुझे। ढ़ंग जीने का आ गया है मुझे।। ख्वाब दे कर नए जमाने के। आज…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Oct 19, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

2001 Oct 21, 2018
Reply by Afroz 'sahr'

"किताबे जीस्त का हर एक बाब पहने हुए सवाल आया है खुद ही जवाब पहने हुए फ़ज़ा-ए-बज़्म नहाई…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Oct 28, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-76

383 Oct 29, 2016
Reply by Samar kabeer

"वो भी काम आए न इक दिन के लिए वक़्फ़ कर दी जिंदगी जिनके लिए जा के ठहरी हैं निगाहें बर्…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied May 27, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-71

1049 May 28, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वफा की राह में हद से जो दीवाना गुज़र जाए जफा के शहर में हर फर्द का नश्शा उतर जाए खुद…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Apr 22, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-70

717 Apr 23, 2016
Reply by Saurabh Pandey

"बेवफा कौन है बा वफ़ा कौन हैसोचता हूँ मेरा हमनवां कौन है इश्क़ का जाम किसके नहीं हाथ म…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"अगयार के आगे ख़म सर अपने नहीं होते तो बंद किसी सूरत दर अपने नहीं होते हम जंग के मैदा…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"जो गुज़रती है मेरे दिल मैं छुपाये न बने दास्ताँ गम की ज़माने को सुनाये न बने ढूढ़ना…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Aug 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-38

1040 Aug 30, 2013
Reply by अरुण कुमार निगम

""

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied Jun 28, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा- अंक 36(Now Closed With 965 Replies)

964 Jul 1, 2013
Reply by आशीष नैथानी 'सलिल'

"कैसा मुनसिफ़ ये फ़ैसला लाया हक़ मे मज़लूम के सज़ा लायागर्क दरिया में हो गया कोई तह स…"

HAFIZ MASOOD MAHMUDABADI replied May 24, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 35

852 May 26, 2013
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service