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जितेन्द्र पस्टारिया's Discussions (963)

Discussions Replied To (887) Replies Latest Activity

"किसने पाप धोये हैं मैली जो हुई गंगा कौन कितना पापी है अर्थियां समझती हैं............…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"बोलते इशारों की खूबियाँ समझती हैं क्या कहें, छुपायें क्या.. लड़कियाँ समझती हैं.......…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"दूर के मुसाफिर हों, अपने हों शहर वाले फूल कौन तोड़ेगा, डालियाँ समझती हैं...........बह…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"क्यूँ उमस है तारी सी अब फ़िज़ाओं में हर सू  किसकी ये शरारत है, बदलियाँ समझती हैं .....…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"पेड़ हो चला बूढा आंधियां समझती हैं पर हवा के हर रुख को पत्तियां समझती हैं............…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"निर्धन पर भी बोझ, बढ़ा है नेता जी | तुमने ही यह तन्त्र, गढ़ा है नेता जी |..........बहु…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 10, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43

603 May 12, 2014
Reply by Satyanarayan Singh

"विषयानुरूप बहुत सुंदर कुंडली रचना प्रस्तुति, बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय सत्यनारायण जी"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 10, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43

603 May 12, 2014
Reply by Satyanarayan Singh

"आपने अपने अंदाज में बहुत ही सुन्दरता से नेताओं के गुण बतलाये है आदरणीय अरुण जी, आपको…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 10, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43

603 May 12, 2014
Reply by Satyanarayan Singh

"वाह! क्या खूब चित्रण किया है नेताओं के चरित्र का , पढ़कर आनंद आ गया राजनीति की खुली…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 10, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43

603 May 12, 2014
Reply by Satyanarayan Singh

"आदरणीय लक्ष्मण जी आपने अपनी इतनी बड़ी ख़ुशी हम सब के साथ साझा की, बहुत अपनापन सा लगा…"

जितेन्द्र पस्टारिया replied May 9, 2014 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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