For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

kanta roy's Discussions (2,219)

Discussions Replied To (1839) Replies Latest Activity

"मेरे इस जबाब से आपका दुखी होना मेरे लिये भी दुख का कारण बना है। जाने कैसे इतना कह गई…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"अच्छा लगता है आपका बेबाक होकर प्रतिक्रिया देना आदरणीय रवि जी।सच कहूँ तो करीब पंद्रह…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"नहीं,आदरणीय समर कबीर जी,आपको इसको समझाना पड़ेगा क्योंकि हम इसको समझने में अक्षम हैं।…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"आदरणीय समर कबीर जी, रचना पर उपस्थिती के लिये हृदय से आभार प्रकट करती हूँ। रचना पर शि…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"ओह! ऐसा है क्या? अब तो ठीक भी नहीं कर सकती हूँ। संकलन में कोशिश करूँगी। अभिनंदन आपको…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"ओह,सर जी, //" मेरे लिये चें चें पें पें ही है। //------- पति का संवाद है। जिसे सुनकर…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"हकीकत को आईना दिखाती एक बेहतरीन लघुकथा है यह। सम्प्रेषणीयता तो कथा की देखते ही बनती…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"आपकी लघुकथा हमेशा नये आयामों को संदर्भित करती हुई एक अलायदा तेवर में कथ्य को उद्देश्…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"आदरणीय त्रैलोक्य रंजन जी, बेहतरीन लघुकथा पेश किया है आपने।संस्कार को जिस तरह से कथ्य…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"लोन प्रवृत्ति पर संचेतना जगाती बहुत ही बढ़िया कथ्य उभरकर आया है आपकी लघुकथा में आदरण…"

kanta roy replied Sep 29, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-18 (विषय: पर्दे के पीछे)

612 Sep 30, 2016
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post उस बेवफ़ा से (ग़ज़ल)
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई । मंच पर काफी दिनों बाद दिखाई दिये ।…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' and Om Prakash Agrawal are now friends
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
11 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)

(1222 1222 122)नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं बशर हूँ ,था बहुत मंहगा कभी मैंअभी जिसने रखा है घर से…See More
12 hours ago
Rahul Verma is now a member of Open Books Online
12 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

उस बेवफ़ा से (ग़ज़ल)

221 / 2121 / 1221 / 212उस बेवफ़ा से दिल का लगाना बहुत हुआमजबूर दिल से हो ये बहाना बहुत हुआ [1]छोड़ो…See More
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/२२२/१२१२कहते भरे हुए हैं अब भण्डार तो बहुतलेकिन गरीब भूख से लाचार तो बहुत।१।**फिरता है आज…See More
12 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

सफेद कौवा(लघुकथा)

कौवा तब सफेद था।बगुलों के साथ आहार के लिए मरी हुई मछलियां, कीड़े वगैरह ढूंढ़ता फिरता। फिर बगुलों…See More
12 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122 नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना दिखो नजदीक लेकिन दूर होना।कली का कुछ समय को ठीक है, पर…See More
12 hours ago
Rakshita Singh commented on विनय कुमार's blog post अब नहीं- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी, नमस्कार बहुत ही सुंदर लघुकथा ... बहुत बहुत बधाई !"
12 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post रंग काला :
"आदरणीय सुशील जी नमस्कार,  बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ ...  वास्तव  में काले रंग की यह भी…"
12 hours ago
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"श्री "मुसाफिर" जी एवं "कबीर " साहब, समीक्षा के लिए धन्यवाद । "
12 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service