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gaurav kumar pandey
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lucknow ,uttar pradesh
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Gaurav kumar pandey's Blog

ग़ज़ल

बह्र 2122 2122 2122



रंजो ग़म में दिल मेरा उलझा हुआ है।

अश्क़ से तकिया तभी भीगा हुआ है।।



तू समझ पाये भी कैसे ये रवानी।

इश्क़ का दरिया तेरा सूखा हुआ है।।



साथ रहकर साथ वो क्योंकर नही था।

हर ज़ुबां पे ये सवाल आया हुआ है।।



ग़म मुझे दो और तुम हद से ज़ियादा।

क्योंकि ये चेहरा मेरा हँसता हुआ है।।



रास्ते भटकूँगा आख़िर क्यों भला मैं।

वक़्त का पहलू मेरा देखा हुआ है।।



पी के सब कड़वाहटें इस ज़िन्दगी की।

दोस्तों लहजा मेरा…

Continue

Posted on January 16, 2017 at 12:30pm — 10 Comments

मुद्दतों की आरजू तब तुम कही जाकर मिले

मुद्दतों की आरजू तब तुम कहीं जाकर मिले।
प्यास बढ़ने की तड़प से ज्यो नदी-सागर मिले।।

सर्द आहों को लिये तकते रहे रस्ता तेरा।
इक नज़र पाने को तेरी हम वहाँ अक़्सर मिले।।

किस्मतों का फैसला ऐसा किया तूने ख़ुदा।
एक के हिस्से में गुल,दूजे को बस पत्थर मिले।।

दो निवाले मुश्किलों से ,चैन भी दिल को नही।
तंगहाली में मगर हम बारहा क़ैसर मिले।।

तीरगी में बा ग़रज हम चल दिये यह सोचकर।
इस दफ़ा ही मुद्दतों के बाद वो रहबर मिले।।
मौलिक तथा अप्रकाशित

Posted on November 22, 2016 at 5:10pm — 6 Comments

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