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कभी -कभी उसे लगता है ....

कभी - कभी उसे लगता है
नेत्र हीन हो जाए
ताकि वह देख न सके ....
शरीर दिखाती औरतें
किसानों की आत्महत्याए
निठारी में नाले से निकले
छोटे -छोटे बच्चों के नर कंकाल
और
सैनिक बेटे को खोने के बाद
एक मूर्छित माँ का चेहरा ॥


कभी -कभी उसे लगता है
बहरा हो जाए
ताकि वह सुन न सके
नेताओं के झूठे आश्वाशन
नक्सलियों के बंदूकों से
गोलियों की तडतड़ाहट
लोक संगीत की जगह फ्यूजन -मयूजिक
और
हमलों में शहीद हुए जवानों की
पत्नियों का विधवा -विलाप॥

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Comment

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Comment by Sanjay Kumar Singh on July 25, 2010 at 2:06pm
Badhiya rachna, samajik sarokar sey judi rachna, badhiya hai,Thanks for this,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 25, 2010 at 10:41am
अच्छी कविता है बब्बन भैया, आंखे बंद कर लेने से अगर सब कुछ ठीक हो जाता तो फिर तो कोई बात ही नहीं थी पर क्या करे सब देखना ही पड़ता है, सुंदर रचना, बधाई,

कृपया ध्यान दे...

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