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अकाल ....
एक दिन में नहीं
कह कर आता है ...धीरे -धीरे ॥

बादल रुठ जाते है
जमीन दरारें दिखाती है
कमल कुम्भला जाते है
चिड़ियों को नहीं मिलता अन्न
बगुले को नहीं मिलते कीटें
धान के खेतों में ॥


सरकार कहती है
कोई नहीं रहेगा भूखा
विदेशों से मंगा लिया जाएगा
चावल -गेहू -दाल ॥

क्या सरकार मिटा देगी
रामू काका के चेहरे पर उगी झुरीयां
जो मुनिया की शादी
टल जाने से हो गई है गहरी ॥

क्या सरकार देख पा रही है
सूखने के कगार पर पहुचे तालाबों में
मछलियों की तड़प ॥

क्या सरकार जंगल/जंगलातों के
नदी - तालाबों में पानी भर सकेगी
ताकि प्यास बुझा सके
कौवे /मोर और चिल्काव

सच में दोस्तों !!!
अकाल में सिर्फ अन्न उत्पादन ही नहीं रुकता
रुक जाती पूरी सृष्टी
टूट जाती है
मानवीय रिश्ते और संवेदना ॥

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 13, 2010 at 8:08am
सचमुच बहुत ही निराशाजनक स्थिति है, पूर्वोतर मे बारिश न होने से अकाल की स्थिति हो गई है, किसानो के चेहरे सुख गये हैं,
आम लोगो के दर्द को बड़े ही मार्मिक रूप से आपने अपनी कविता मे समेटा है , बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति, धन्यवाद,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 12, 2010 at 9:07pm
सरकार कहती है
कोई नहीं रहेगा भूखा
विदेशों से मंगा लिया जाएगा
चावल -गेहू -दाल ॥

bahut hi badhiya rachna hai baban bhaiya.....bahut dino baad aapki rachna padhne ko mili hai aur wo bhi shaandar....
aisehi likhte rahe baban bhaiya...

aapki agli rachna ke intezaar me...
preetam tiwary
ranchi
8051853108

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