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"निभाते जो साथ तो बात कुछ और थी”

मेरी जिन्दगी का मतलब काश की समझे होते,    

होते न आज इतने दूर  तो बात कुछ और होती.
है किस्मत कितनी बुरी बोलती है ऐ मेरे हाँथ की लकीरे,        
तुम पास होते तो बात कुछ और होती.                        
मै अब मेरी जिंदगी से करू क्या शिकवा गम नहीं मरने का,     
तुम साथ होते तो बात कुछ और होती.                            
एक लम्बी प्रेम पारी हम साथ चले,राहे तुम बदल लिए तो क्या ,       
जो हमदम चले होते आज साथ तो बात कुछ और होती.             
पूल्कित प्रेम नयन का दर्पण था तुम्हारा  मै                            
मुझमे देख सँवरते, तो बात कुछ और होती

इन काली घटाएं गेसूयो की छटाएं  को आप लाख संवारो ,

मेरे प्रेम हांथो से सँवरते तो बात कुछ और होती.                                              

करते है आप जो श्रृंगार  करता है कोई नज़रन्दाज,

मेरे लिए करते जो आज  तो बात कुछ और होती.

मेरे मन मूरत है आप दिल की गहराईयों से अपनाया था,

आप भी अपनाते हमें तो बात कुछ  और होती.

कुछ वरस अपना कर प्रेम बंधन तोड़ अलविदा कह चल दिए

गर जो आप चाहत का सिलसिला बठाते तो बात कुछ और थी.

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Comment

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Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on April 5, 2011 at 3:24pm
श्री गणेश जी "बागी",और वन्दना जी, को बहुत आभार और नमस्कार,  

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 4, 2011 at 8:13pm
बहुत बढ़िया संजय जी, अच्छा प्रयास , आभार !
Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 27, 2011 at 2:13pm
आज पहली बार मैंने पि है, 
आप के जुदाई में मैंने ऐ जिंदगी जी है.
तुम इस तरह मुझे  भूल  जाओगे,
समझ के भी मैंने जीने की भूल की है. 

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