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भारतीय कुत्ते

भारत
कुत्तों के भौकने की
इधर -उधर सूघने की
एक अच्छी जगह ॥

गाहे -बगाहे
समय -कुसमय
चोर देखकर भौकना
और कभी -कभी
बिना चोर देखे
तेजी से भौकना ॥

गज़ब चरित्र है इनका ...
साधारण जनता
इनकी मानसिकता नहीं समझ सकते ॥

कुत्तों की सर्वोच्च संस्था
कहती है .....
भौकने की यह प्रवृति
परिपक्वता को दर्शाता है ॥

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Comment

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Comment by Sanjay Kumar Singh on June 22, 2010 at 2:54pm
Kutto key upar sunder rachna, kahi pey nigahey , kahi pey nishana, badhiya hai, shandar prastuti, thanks ,
Comment by satish mapatpuri on June 21, 2010 at 4:08pm
गज़ब चरित्र है इनका ...
साधारण जनता
इनकी मानसिकता नहीं समझ सकते ॥

कुत्तों की सर्वोच्च संस्था
कहती है .....
भौकने की यह प्रवृति
परिपक्वता को दर्शाता है ॥
बड़ा गहरा व्यंग है बब्बन जी, बधाई.
Comment by Prabhakar Pandey on June 21, 2010 at 3:36pm
और कभी -कभी
बिना चोर देखे
तेजी से भौकना ॥
.......................................]
कुत्तों की सर्वोच्च संस्था
कहती है .....
भौकने की यह प्रवृति
परिपक्वता को दर्शाता है ॥ .....एकदम यथार्थ ।।। सादर।।
Comment by Admin on June 21, 2010 at 2:28pm
बब्बन भाई , बहुत बढ़िया कविता लिखे है , कुत्ते ही ऐसे होते है जो मनुष्य के स्वाभाव को भली भाति समझ लेते है उनके भौकने का भी कुछ न कुछ कारण जरूर होता है ,ये अलग बात है की हम समझ पाये या नहीं, अच्छी रचना एवं खुबसूरत अभिव्यक्ति है,

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