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नया सवेरा - -दीपक मेनारिया

सुनील बीती रात से करवट पर करवट ले रहा था, उसे किसी भी तरह सुबह होने का इंतज़ार था, आँखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी। उसे उम्मीद थी कि कल का सूरज उसके जीवन में नया सवेरा लायेगा क्यूंकि कल सुबह उसका आईआईटी का परिणाम आने वाला था किन्तु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
सुबह होने पर सुनील का मुंह लटक गया था। परिणाम आया और वह क्वालीफाई नहीं कर सका था। बड़े भाई ने उसकी मनोदशा देख कर प्यार से कहा, तुम परीक्षा में असफल हो गए, इस बात पर इतना अधिक दुख क्यों?
भैया, मैंने दिन-रात मेहनत की और आपका कितना पैसा खर्च हो गया और ये परिणाम आया ? मैं बहुत शर्मिंदा हूं भैया, सुबकते हुए सुनील ने कहा। बचपन में पापा के गुजरने के बाद आज तक आपने मुझे पापा की कमी महसूस नहीं होने दी और मैंने आज आपको यह परिणाम दिया । मेरा जीवन अब अंधकार से भर गया हैं, मैं कुछ नहीं कर सकता । मैं किसी काम का नहीं । लेकिन मुझे बिलकुल भी दुख नहीं है। बल्कि मैं तो खुश हूं, भैया ने अपने चेहरे पर मुस्कराहट लाते हुए कहा। सुनील को बहुत आश्चर्य हो रहा था।
तुम्हें मालूम है सुनील, आज देश में बेरोजगार इंजीनियरों की संख्या लाखों में है। मुझे भी अंदर ही अंदर चिंता सताये जा रही थी कि तुम भी उस सूची में शामिल न हो जाओ। मेरी वह चिंता अब खत्म हो गई इस परीक्षा से तुम्हारा दाखिला बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में होता । सोचो, कितना खर्च कर तुम बेरोजगार इंजीनियर बनते तो मुझे कितना दुःख होता। दाखिले के बाद मेरी दिन-रात मेहनत का पैसा लगता है और फिर तुम बेरोजगार होकर नौकरी के लिए यहाँ से वहां भटकते रहते ।
भैया, सुनील को बहुत ही प्रेम, स्नेह एवं गंभीरता से समझा रहे थे और सुनील के सामने से जैसे एक-एक कर किताब के सारे पन्ने पलट रहे थे। अच्छा हुआ जो तुम्हारा उस परीक्षा में दाखिला नहीं हुआ । तुम्हारे पास अब मौका है कि तुम अपना बिजनेस करो एवं एक बड़े और अच्छे बिज़नेसमैन बनो । आज सभी नौजवान बिज़नेस करके ही आगे बढ़ रहे हैं एवं अपना एवं औरो का भविष्य सुरक्षित करो । एक नया सवेरा तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हैं । संघर्ष करो और जीत अपनी मुट्ठी में कर लो ।
सुनील को अंधकार में नया सवेरा खिलता दिखा और वह पहले से ज्यादा मजबूत लगा ।
मौलिक/अप्रकाशित -दीपक मेनारिया

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Comment by DEEPAK MENARIA on July 10, 2019 at 8:24pm
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