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Akhand Gahmari's Discussions (341)

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"बोझ ढोना तो मजबूरी है हम ग़रीबों की, पेट की बग़ावत को पसलियाँ समझती हैं। आज की हकीकत ब…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"जो मिला सुकूने दिल फूल पर उन्हें उसकी, कैफियत सभी उड़ती तितलियाँ समझती हैं, वाह सर क्…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"शाम तक अकेलापन रात भी अकेली सी घुट रहा है दम मेरा दूरियाँ समझती हैं--------इस शेर के…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"कौन पैसे वाला है लड़कियां समझती हैं किसकी जेब खाली है उँगलियाँ समझती हैं  ---क्‍या बा…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"उम्र भर नहीं समझे जिन्दगी अबूझी थी अर्थ आखिरी शायद अर्थियॉं समझती हैं।  अर्थियाँ समझ…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"बोलते इशारों की खूबियाँ समझती हैं क्या कहें, छुपायें क्या.. लड़कियाँ समझती हैं ---अनु…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"पल दो पल कहीं जीवन, मौत का कहीं तांडव खेल है ये साँसों का, अर्थियाँ समझती हैं  एक कड…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"आपके नौकरीपेशा जिन्‍दगी का अंतिम आयोजन में आपकी गजल का स्‍वागत है आदरणीय दो न दो सह…"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"आदरणीय लक्ष्‍मण प्रसाद लाडीवाल जी आपने गजल को पंसद कर उत्‍साहवर्धन किया आपको नमन"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

"आदरणीय सत्‍यनारायण सिह जी आपने गजल को पंसद कर उत्‍साहवर्धन किया आपको नमन"

Akhand Gahmari replied May 24, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-47

848 May 25, 2014
Reply by अरुण कुमार निगम

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आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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