For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मनोज अहसास's Discussions (223)

Discussions Replied To (222) Replies Latest Activity

"अपना ख़्याल रखिये सर मुशायरे तो होते रहेंगे सादर"

मनोज अहसास replied Sep 27, 2024 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-171

176 Sep 28, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय समर कबीर साहब समेत सभी साथियों को गुरुजनों को सादर प्रणाम आज बहुत दिनों बाद त…"

मनोज अहसास replied Sep 26, 2024 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-171

176 Sep 28, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"दर्द था,चैन था,दवा भी थी। जब तलक इश्क़ था,दुआ भी थी। आप खामोशी मेरी सुनते थे, मेरे…"

मनोज अहसास replied Sep 26, 2024 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-171

176 Sep 28, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"बहुत बहुत आभार आदरणीय"

मनोज अहसास replied Aug 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134

243 Aug 28, 2021
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय समर कबीर साहब  सादर प्रणाम आपका आशीर्वाद हमारी पूंजी है बहुत बहुत आभार"

मनोज अहसास replied Aug 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134

243 Aug 28, 2021
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"हार्दिक आभार आदरणीय"

मनोज अहसास replied Aug 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134

243 Aug 28, 2021
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"हार्दिक आभार आदरणीय"

मनोज अहसास replied Aug 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134

243 Aug 28, 2021
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय अमीर साहब ग़ज़ल पर इतनी विस्तृत और बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभा…"

मनोज अहसास replied Aug 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134

243 Aug 28, 2021
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"निगाहें हो रही बेताब देखने के लिए सहर का टूटा हुआ ख्वाब देखने के लिए मेरी ज़ुबा पे न…"

मनोज अहसास replied Aug 27, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134

243 Aug 28, 2021
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"ये दिल जहां से लड़कर बेजान हो न जाएइक दिन कहीं तू मुझसे अंजान हो न जाए लफ़्ज़ों में धु…"

मनोज अहसास replied Jan 26, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91

272 Jan 27, 2018
Reply by surender insan

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
7 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service