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Chetan Prakash's Discussions (710)

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"तुम्हें अठखेलियों से याद आया मुझे कुछ तितलियों से याद आया  टपकने जा रही है छत वो ज…"

Chetan Prakash replied Nov 27, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185

59 Nov 28, 2025
Reply by Jaihind Raipuri

"वो भी क्या दिन थे... आँख मिचौली भवन भरे, पढ़ते   खाते    साथ । चुराते टिफिन  हम नि…"

Chetan Prakash replied Nov 15, 2025 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-180

14 Nov 17, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय,  श्रद्धेय तिलक राज कपूर साहब, क्षमा करें किन्तु, " मानो स्वयं का भूला पता या…"

Chetan Prakash replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

" आ. महेन्द्र कुमार जी, 1." हमदर्द सारे झूठे यहाँ धोखे बाज हैं" (हम दर्द, 221,  सारे…"

Chetan Prakash replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"आदरणीय,  दयाराम जी मेधानी, कृपया ध्यान दें कि 1. " ये ज़िन्दगी फ़ज़ूल,  वाक्यांश है,…"

Chetan Prakash replied Oct 26, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"जनाब, Gajendra shotriya, आ.' 'मुसाफिर ' साहब को प्रेषित मेरा प्रत्युत्तर आप, कृपया,…"

Chetan Prakash replied Oct 25, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"आ. मुसाफिर' साहब मैं आप की टिप्पणी से सहमत  नहीं हूँ। मेरी ग़ज़ल के सभी शे'र  बह्र…"

Chetan Prakash replied Oct 25, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"221    2121    1221    212    किस को बताऊँ दोस्त  मैं क्या याद आ गया ये   ज़िन्दगी …"

Chetan Prakash replied Oct 25, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-184

76 Oct 26, 2025
Reply by Tilak Raj Kapoor

"हर कहानी को कई रूप रुहानी लिखना ज़ाविया दे कहीं हर बात नूरानी लिखना मौलवी हो या वो…"

Chetan Prakash replied Sep 27, 2025 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-183

93 Sep 29, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

"माँ की नहीं धरा कोई तुलना है  माँ तो माँ है, देवी होती है ! माँ जननी है सब कुछ देती…"

Chetan Prakash replied Sep 14, 2025 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-178

18 Sep 14, 2025
Reply by मिथिलेश वामनकर

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दोहा पंचक. . . . क्रोधमानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध…See More
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२२१/२१२१/१२२१/२१२ * ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं…See More
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"किसने कहा छंद स्वर आधारित 'ही' हैं। तब तो शब्दों के अशुद्ध उच्चारण करने वाले छांदसिक…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार ।सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।। ............ क्या…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"इस स्नेहिल अनुमोदन हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी. "
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