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kanta roy's Discussions (2,219)

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"आपने  बिलकुल  सही  कहा  है  सर  जी ,प्रस्तुत रचना में कई  कमियाँ है .  आयोजन  का  शु…"

kanta roy replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आपकी  प्रस्तुत   विवेचनाओं ने मन  में  खलबली -सी  मचा दी  है जो  साहित्य का  उद्देश्…"

kanta roy replied May 14, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"मानव हैं मानव का जग में, बनकर रहें सहारा.-------- श्रेष्ठतम भाव है यहाँ आपकी इस छंद…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"यही है ग़म कभी आया नहीं है रोशनी में वह  नज़र का तीर जब भी उसने इस दिल पर चलाया है ।-…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"नेत्र बंद कर लेने पर भी, प्रकाश पुंज दिखता है स्पष्ट इसी के सहारे अज्ञात भी होता है…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"आग, दीपक, लालटेन सेएल.ई.डी. होती ज़िन्दगी।नीली-पीली, नारंगी सेसफ़ेद, झक्क सफ़ेद होती…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

" सुन्दर  पंक्तियाँ  बनी है  आपकी  आदरणीय चौथमल जी ,बधाई "

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"अपने सही होने का यकीन आत्म विश्वास तो बढ़ाता है मगर मै ही सही हूँ सिर्फ  और सिर्फ मै…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"अद्भुत मनोरमलगता आकाश।स्याही पे बिखरास्वर्णिम प्रकाश।।"मानो नीली साड़ी पर हुई स्वर्णि…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

"सीले जर्जर से कमरे में ,पड़ी हुई जैसे सामान दौड़ लगी जुगनूं के पीछे ,भूले सब प्रकाश की…"

kanta roy replied May 13, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-67

620 May 15, 2016
Reply by Samar kabeer

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*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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