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munish tanha's Discussions (683)

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"पांच रुपये में क्या कुछ नहीं।जीने के लिए और क्या चाहिए।विजय शंकर साहिब सुंदर रचना बध…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कहाँ परायों की अपनों की महरबानी हैहुआ यूँ ही न मैं दीदारे यार से वंचित।..बधाई स्वीका…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"उपवन शरमाते, पर्वत पर झरने गुर्राते, हर ओर कलरव सा छाया , क्षेत्र लगते लड़खड़ाते,आम्र…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"पग पग पर वंचक बिखरे हैं,बचती न वंचना से जनता।आशा जिन पर टिकी हुई है,छलते वे जब कहे न…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"दिलों मे हावी हो रहा हैदिमाग का शतरंजी खेल ....अलग थलग किए जा रहे हैआँख की किरकिरी ब…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"हम सब मिलकरमेक इन इंडिया कानारा बुलंद कर रहे हैंविदेशी उत्पाद केग़ुलाम बन केस्वदेशीपन…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"रेगिस्तां की आंधियों में इक  दिया टिमटिमाता है,लौ थी थरथराती हुई , अब जाकर स्थिर हु…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

" खुदगर्जी की कंकरीट ने    मन की मिट्टी पत्थर कर दी I जीवन के निर्मल प्रवाह में काई स…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बाँ..बाँ..कहकर रोती रही मैं, कैसे माँ के बिना जिऊँगी। अभी उम्र है छोटी मेरी, जाने क…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"देख रहा तू आज कल, हर इंसां को प्यार से ।वंचित हम क्यों रह गये, तेरे इस उपकार से ।।कि…"

munish tanha replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
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Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
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"सादर अभिवादन।"
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
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