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munish tanha
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munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"212-1222-212-1222आदमी नहीं मिलते अब यहाँ मिसालों मेंबिक गए सभी देखो सिर्फ दो निवालों में जिंदगी कभी रहती थी जहां उजालों मेंआपको मिलेगी डूबी वो आज प्यालों में प्यार गर किया दिल से फिर तो आपके मोहनढूंढती फिरे राधा वो मिले ग्वालों में इक अदा लगे…"
Aug 23
dandpani nahak left a comment for munish tanha
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया आपका मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा ह्रदय से आभार"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""अश्कों के समंदर में न पतवार चलेगी  अब कश्ती मेरी कौन निकालेगा भँवर से" आदरणीय रचना जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""इक रब्त अजब सा है मेरे आँसू में, मुझ में आँखों से गिरा वो मेरी, मैं तेरी नज़र से." आदरणीय निलेश  जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""अटके हुए हैं शाखों पे किस्से कई अब भी बचपन की महक आती है आँगन के शजर से " आदरणीय अंजली गुप्ता  जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""वो मौका भी  छूटा  है  सनम  शह्र में आयेकर बात जो  लेते  थे  कभी  गाँव शजर से।" आदरणीय लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""दीवार ही दीवार से आँगन ये बँटा जब चुपचाप खड़ा आज क्यूँ मत पूछिए घर से।" आदरणीय अरुण कुमार निगम जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""पतवार पकड़ने का सलीका नहीं जिसको  कैसे वो निकालेगा तुम्हें यार भँवर से |" आदरणीय अनीस शेख जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""शिकवे वो किया करता है क्यों शाम-ओ-सहर सेजो शख़्स कभी धूप में निकला नहीं घर से" आदरणीय दंडपानी नाहक  जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""बेदर्द पिया जैसा तु क्यों अब्र बना है,कब से ही लगा आस ज़मीं बैठी तु बरसे।" आदरणीय बासुदेव अग्रवाल "नमन" जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""परवाह नहीं करते हैं जाँबाज़ सिपाही तहरीर वो लिखते हैं सदा ख़ून-ए-जिगर से" आदरणीय नादिर खान जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""परवाह नहीं करते हैं जाँबाज़ सिपाही तहरीर वो लिखते हैं सदा ख़ून-ए-जिगर से"    आदरणीय नादिर खान  जी बहुत बढिया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
" नज़रें  मिली जो मुझसे तेरी दिल को  लगा यूँ पिघला कोई सीसा तेरी आँखों के हुनर से आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत बढिया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""नफरत के हो या फिर तेरे जज्बात के बादल।बरसे जो कभी हम पे, तो जी जान से बरसे।।४।।" आदरणीय अमित जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
""जब से गयी है लौट के आई नहीं है वो ।क्या कह दिया साहिल ने मुहब्बत में लहर से ।।" आदरणीय त्रिपाठी जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें |"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"                                                        "इक ख़ौफ़ सताता है,निकलता हूं जो घर से।दम तोड़…"
Jul 27

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

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Posted on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
Continue

Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

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At 10:04pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया आपका मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा ह्रदय से आभार
At 11:07pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीस तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया तहे दिल से मेरा हौसला बढ़ाने के लिए
At 9:36pm on March 23, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

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"बहुत खूबसूरत तुकांत कविता आ० छोटेलाल सिंह जी बहुत बहुत बधाई "
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