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munish tanha
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munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"ले कर मता-ए-जां भी चलो दिल के साथ साथ ।सौदा ये वो नहीं है कि सस्ता कहें जिसे । बेग साहिब क्या बात है "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"सारे जवान पेड़ लगे डर से काँपने,अब तो रहा न एक भी बूढ़ा कहें जिसे। वाह भाई अजय क्या रवानगी है "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"दंगाइयों ने छीन लिया बचपना तमाम इस शह्र में कोई नहीं बच्चा कहें जिसे राजेश साहिबा बहुत अच्छा "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"शोलों को दीजिए न हवा बल्कि मोह्तरमवो नूर लाइये कि उजाला कहें जिसे शिज्जु भाई जिंदाबाद "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"है जिस्म की ही आरजु हर शख्स को यहां।है ही नहीं ये प्यार वो गहरा कहें जिसे। वाह अमित जी "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"रिश्तों को भूल बच्चे हैं परदेस जा बसेबूढ़ों की लाठी कौन, सहारा कहें जिसे । बेहतरीन प्रयास "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"जो चीखते हैं ज़ोर से अपनी सफाई में होता है उनकी दाल में काला कहें जिसे  नादिर भाई बहुत उम्दा "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"नाज़िल हुई जो दिल पे फ़क़ीराना शख़्सियतहमको मिला न कोई पराया कहें जिसे कमाल है दिनेश जी "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"इंसान का ही मिलना अज़ीज़ो मुहाल है,ऐसा यहाँ है कौन फ़रिश्ता कहें जिसे। रवि भाई कमाल है कमाल है "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"उनकी मिसाल ढूंढने से भी न मिल सकीहै कौन इस ज़माने में उनसा कहें जिसे वाह अंजलि साहिबा बहुत अच्छा प्रयास "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"जुगनू की तर’ह रात का यूँ सामना करें सारे चिराग़ रात का जलना कहें जिसे निलेश भाई जिंदाबाद "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"विनय जी अच्छा  ग़ज़ल का प्रयास "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"दावा तो कर रहे हैं सभी पारसाई का। ऐसा कोई बताओ कि सच्चा कहें जिसे सहर साहिब कमाल "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"वो आइने का अक्स है लोगो क़मर नहीं अहले जहां हबीब के जैसा कहें जिसे l खान साहिब मुबारकबाद "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"कुछ और नाम इसके सिवा सूझता नहींअपनी वो ज़िन्दगी है तमाशा कहें जिसे सुरेन्द्र जी बधाई "
Sep 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"खट्टे  निंबू के छिलके,   परोसे पशु समझ कोई दे प्यार से विष तो अपना कहें जिसे वाह झा साहिब वाह"
Sep 28

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
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Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

जनाब का हुक्म मानकर.... ग़ज़ल

1222-1222-1222-1222



जहां में आप सा हमको कोई कामिल नहीं मिलता

मिले हमको कई अच्छे मगर आकिल नहीं मिलता 



जिन्हें तूफ़ान से लड़ना उन्हें फिर कौन रोकेगा

वही पाते हैं मंजिल को जिन्हें साहिल नहीं मिलता



तुम्हें मालूम है लेकिन बता सकते नहीं किस्सा

अजब घटना घटी देखो हमें फाजिल नहीं मिलता



खुदा मालिक है दुनिया का उसे सबसे मुहब्बत है

सहारा वो नहीं देता कभी साहिल नहीं मिलता



गगन मिट्टी हवा पानी हमें जीने को देता है

बसा…

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Posted on January 26, 2017 at 10:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल- दर्द जो नातवां से उठता है

दर्द जो नातवां से उठता है
शोर वो आस्तां से उठता है


गीत भी देख लो छुपे भीतर
दर्द दिल में जहां से उठता है


नाम की भूख ने बदल डाला
क्यूँ धुंआ अब यहाँ से उठता है


प्यार बांटो सदा जमाने में
बोल सच्चा फुगां से उठता है


उम्र बीती समझ नहीं आया
रोज झगड़ा बयां से उठता है


जिंदगी आज बन्दगी 'तन्हा'

नाम उसका ही जां से उठता है....

.
मुनीश 'तन्हा'.
मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 24, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

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At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

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