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munish tanha
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munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"­इस ज़मीं पे हर जगह गर आशिया हो जाएँगे रोग पीड़ा फ़िक्र फिर सब देरमां हो जाएँगे   गर खुदा के नाम से हम नातवां हो जाएँगे हर तरफ फिर देखिएगा वद गुमां हो जाएँगे   आगे बढने की ललक जो आज तुझमे है उठी इस ललक से देखना हम शादमां हो…"
Jul 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"प्यार की इक हसीं निशानी है जो मुझे आपको दिखानी है लफ्ज़ दर लफ्ज़ याद है मुझको बात बेशक बहुत पुरानी है हर तरफ ज़िक्र यूँ उसी का था जब मिला तो लगा दिवानी है दर्द का अब्र सा उठा ऐसा हो गई शाम फिर सुहानी है इक मजा सा छुपा फ़साने में रात है नींद है कहानी…"
Jun 27
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"         ग़ज़ल   लड़खड़ाया है सदा झूठ का लहजा देखो सच दमकता ही रहेगा मेरा चेहरा देखो चैन आता ही नहीं आज कहीं भी जाएँ दिल धडकता है बहुत आज हमारा देखो चाँद तारे भी मुहब्बत की दुहाई मांगें इस तरह आज तुम्हें दिल ने…"
May 25
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय सुरेंदर जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आपको हार्दिक बधाई "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आपको हार्दिक बधाई "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय अफ़रोज सहर साहिब जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई क़ुबूल कीजिए "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब राणा परताप सिंह जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया आदरणीय सुनंदा साहिबा जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब रवी शुक्ला जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब निलेश जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब लक्ष्मण धामी जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब तस्दीक अहमद जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब मोहम्मद आरिफ जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब सुरेंदर जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"शुक्रिया जनाब शिज्जु शकूर जी "
Apr 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"जनाब समर कबीर साहिब जी सोच शब्द छूट गया था किसी वजह से क्षमा करें  स्नेह बनाए रखें "
Apr 28

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
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Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

जनाब का हुक्म मानकर.... ग़ज़ल

1222-1222-1222-1222



जहां में आप सा हमको कोई कामिल नहीं मिलता

मिले हमको कई अच्छे मगर आकिल नहीं मिलता 



जिन्हें तूफ़ान से लड़ना उन्हें फिर कौन रोकेगा

वही पाते हैं मंजिल को जिन्हें साहिल नहीं मिलता



तुम्हें मालूम है लेकिन बता सकते नहीं किस्सा

अजब घटना घटी देखो हमें फाजिल नहीं मिलता



खुदा मालिक है दुनिया का उसे सबसे मुहब्बत है

सहारा वो नहीं देता कभी साहिल नहीं मिलता



गगन मिट्टी हवा पानी हमें जीने को देता है

बसा…

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Posted on January 26, 2017 at 10:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल- दर्द जो नातवां से उठता है

दर्द जो नातवां से उठता है
शोर वो आस्तां से उठता है


गीत भी देख लो छुपे भीतर
दर्द दिल में जहां से उठता है


नाम की भूख ने बदल डाला
क्यूँ धुंआ अब यहाँ से उठता है


प्यार बांटो सदा जमाने में
बोल सच्चा फुगां से उठता है


उम्र बीती समझ नहीं आया
रोज झगड़ा बयां से उठता है


जिंदगी आज बन्दगी 'तन्हा'

नाम उसका ही जां से उठता है....

.
मुनीश 'तन्हा'.
मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 24, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

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At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

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