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Nita Kasar's Discussions (1,273)

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"अपने अपने ख्यालात है यहाँ पत्नि की पीड़ा तो मायने रखती है पर पति का दोष क्या था।ज़िं…"

Nita Kasar replied Feb 28, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11 (विषय: साथी)

1380 Mar 1, 2016
Reply by kanta roy

"माँ बेटे की रग रग पहचानती है परवाह करती है पर वह ठगी जाय ये तो नामुमकिन है।माँ ने बे…"

Nita Kasar replied Feb 28, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11 (विषय: साथी)

1380 Mar 1, 2016
Reply by kanta roy

"पुरूस्कार पाने की लालसा की पोल खुल ही जाती है।जब काम बोलता है तो नाम मिलता है ।सार्थ…"

Nita Kasar replied Feb 28, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11 (विषय: साथी)

1380 Mar 1, 2016
Reply by kanta roy

"क्या करती कविता किसे सुनाती अपने आप से दो बातें करना नव वधू के मन की व्यथा के सटीक च…"

Nita Kasar replied Feb 28, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11 (विषय: साथी)

1380 Mar 1, 2016
Reply by kanta roy

"नायिका का ये कैसा भरोसा है साथी पर इतने बड़े दिल की पत्नि हो सकती है।समाज की माँग है…"

Nita Kasar replied Feb 28, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11 (विषय: साथी)

1380 Mar 1, 2016
Reply by kanta roy

"प्रवासी पिया – (लघुकथा ) - दरवाजे पर दस्तक हुई अचानक रचनाबेन को देख माता पिता हैरान…"

Nita Kasar replied Feb 28, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11 (विषय: साथी)

1380 Mar 1, 2016
Reply by kanta roy

प्रधान संपादक

"आयोजन की सफलता के लिये बहुत बहुत बधाईयां आद०योगराज प्रभाकर जी ।इस बार आयोजन में आधी…"

Nita Kasar replied Feb 7, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 में स्वीकृत रचनाएँ

70 Feb 18, 2016
Reply by योगराज प्रभाकर

"बच्चे मन के सच्चे होते है उनकी मुस्कान मोहित कर लेती है कथा पारिवारिक माहौल की खूबसू…"

Nita Kasar replied Jan 31, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"हार्दिक आभार आपका आद०नीता सैनी जी ।"

Nita Kasar replied Jan 31, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

"हार्दिक आभार आपका आद०अर्चना त्रिपाठी जी ।"

Nita Kasar replied Jan 31, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 (विषय: रंग)

1352 Feb 1, 2016
Reply by rajesh kumari

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

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"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

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