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Ravi Shukla's Discussions (1,143)

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"आदरणीय पंकज जी मुशायरे का आगाज़ करने और सुंदर अशआर के लिए बधाई ।"

Ravi Shukla replied Mar 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-69

668 Mar 26, 2016
Reply by Dr.varsha choubey

"आदरणीय सशील सरना जी इस महीने का सक्रिय सदस्‍य चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई स्‍वीकार क…"

Ravi Shukla replied Mar 17, 2016 to एक घोषणा:-महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)

1065 Dec 3, 2016
Reply by सुरेश कुमार 'कल्याण'

"आदरणीय शरीफ अहमद जी, बढि़या गजल कही है आपने, इशारे समझ में आ रहे है बस नजरिये की बात…"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणीय मसूद जी क्‍या अशआर पेश किये है आपने बहुत खूब  शेर दर शेर दिली बधाई कुबूल करें…"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणीय शफाअत जी  बढि़या गजल कही है आपने गिरह भी शानदार है और मकते के शेर के लिये अलग…"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणीय सचिन देव जी इस सुन्‍दर गजल के लिये हार्दिक बधाई स्‍वीकार करें"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणीया कांता जी ग़ज़ल पर आपके प्रयास के लिये बहुत बहुत बधाई स्‍वीकार करें   तीसरे श…"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणी योजराज जी, आपकी बधाई सर आंखाे पर, मुशायरे में ग़ज़ल पेश करने के बाद प्रतिक्रिय…"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणीय दीपक जी आपका संदेश गलत थ्रेड मे आ गया है अपनी प्रतिक्रिया शायर की रचना के नीच…"

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

"आदरणीय लक्ष्‍मण जी बहुत सुन्‍दर गजल कही है आपने दिली बधाई स्‍वीकार कीजिये । "

Ravi Shukla replied Feb 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-68

1191 Feb 27, 2016
Reply by shree suneel

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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