For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लोकपाल विधेयक आज सबसे ज्यादा गंभीर बहस का मुद्दा है. लोकपाल विधेयक के लिए दोनों तंत्रों में भारी भिड़न्त है. एक विधेयक सरकारी तंत्र के द्वारा लाया जा रहा है और दूसरा विधेयक प्रख्यात गांधीवादी अन्ना हाजरे के द्वारा. अन्ना हाजरे का दावा है कि उनके द्वारा बनाया जाने वाला विधेयक ही भ्रष्टाचार का निदान है जिसे जनता का व्यापक समर्थन है. जबकि सरकारी तंत्र का दावा है कि उनका विधेयक स्वयं इतना ताकतवर है. बहस के इस मुद्दे पर असली सवाल छूट जाता है. दरअसल इस बहस में जनता का असली मुद्दा गायब है और वह मुद्दा है जनता के रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और चिकित्सा की सुविधा को बरकरार रखना. असली मुद्दा है विधेयक नहीं वरन् यह व्यवस्था है जिसका सर्वेसर्वा अवशेष सामंत और पूंजीपति है, जिसकी सेवा करना ही इस व्यवस्था का असली मकसद है. इसमें जनता कहीं भी नहीं है. देश में विभिन्न प्रकार की सैकड़ों कानूनें बनायी गई है, जिसका मूल आत्मा अंग्रेजी हुकूमत की है. आजाद भारत ने वह तमाम धारायें व कानूनें आज तक सलामत रखी है, जिसका निर्माण अंग्रेजी हुकूमत ने किया था. जिसका उद्देश्य कतई जनता की सेवा करना नहीं था. जिस प्रकार बनी या बनाई गई सैकड़ों-हजारों कानून जनता की कोई सेवा नहीं कर सकी है, उसी तरह क्या गारंटी है कि लाई जाने वाली लोकपाल विधेयक भी जनता की सेवा कर सकेगी ?
नहीं, कोई गारंटी नहीं है.
दरअसल भ्रष्टाचार के कारण देश में शासक वर्ग जो सामंतवाद और पूंजीवाद का सेवा करता है, देश तथा दुनिया की निगाहों में व्यापक बदनामी से बचना चाहता है. किसी हद तक माओवादियों का आतंक भी सर पर मंडरा रहा है, जो देश में गृहयुद्ध छेड़ कर शासक वर्ग को नस्तेनाबूद कर अपना शासन कायम करने के लिए जद्दोजहद कर रहा है. दरअसल अन्ना बनाम सरकार की लड़ाई से जनता का कुछ भी लेना देना नहीं है, यह दरअसल शासक वर्गों का आपसी अन्तरविरोध ही है, जिसका हल अन्ततोगत्वा अमेरीका के सहमति से हो जाना है. आम जनता महज दर्शक है. कानून बनाने से समस्या हल नहीं होगा, यह हम पिछले सात-आठ दशकों से देख चुके हैं. वरन् व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करके ही भ्रष्ट्राचार की समस्या सहित जनता की तमाम मूल समस्या का निदान होना संभव है. जैसे सूचना के अधिकार का कानून बन जाने मात्र से सूचना मांगने पर मिल नहीं जाती, वरन् सूचना मांगनेवाले मौत के घाट भी उतारे जा रहे हैं. एक ऐतिहासिक तथ्य है: एक बादशाह के जमाने में एक कानून पारित किया गया था कि जिस दरोगा के क्षेत्र में किसी व्यापारी को जान-माल की क्षति होगी, उस दरोगा को उसकी भरपायी करनी होगी. एक व्यापारी का माल डकैतों ने लूट लिया. दरोगा को रिपोर्ट देने गया. दरोगा ने उस व्यापारी की इतनी बेरहम पिटाई करवाई की वह बिना अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाये वहां से चला गया. क्या बिना व्यवस्था बदले लोकपाल के इस नियम से भ्रष्टाचार मिट जायेगा या काबू कर लिया जायेगा ? यह एक गंभीर सवाल है, जिसका हल सिर्फ जागरूक और लड़ाकू जनता ही खोज सकती है.

Views: 171

Reply to This

Replies to This Discussion

खाओ कसम इस देश से चोरो को भगा देंगे बेईमान मंसूबो मे आग लगा देंगे भारत मे रहकर जो करे राष्ट्रद्रोह की बाते एसे सभी निशान भारत से मिटा देंगे" देश की सरकार जनता को यू गुमराह नही कर सकती इस देश की मिट्टी मे बहुत दम हे सरकार इस देश से भ्रष्टाचार हटाना ही नही चाहती. जागो देश वासीयो हमे जनलोकपाल चाहिए और हम लाकर रहेंगे. एक ७० साल के व्रद्ध ९ दिन से बिना कुछ खाए अनशन पर हे वो भी हमारी भलाई के लिए देश की भलाई के लिए उनका साथ दो. ईश्वर को भी मुँह दिखाना हे अपनी आत्मा की आवाज़ सुनो वरना तुम्हारा अंतरमन तुम्हे कभी माफ़ नही करेगा

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"गज़ल का सबसे जानदार शेर नौकरी मत  ढूढ़  तू इस मुल्क में ।अब तेरे हिस्से की थाली जाएगी ।।"
42 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"फूँक कर छाछ पी रहा है वो ।आदमी दूध का जला क्या है ।। चाँद दिखता नहीं है कुछ दिन से ।घर पे पहरा कोई…"
44 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared vijay nikore's blog post on Facebook
50 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post महक
"बहुत खुब"
51 minutes ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post on Facebook
51 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए  छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला…See More
2 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

इलाज़  - लघुकथा  -

इलाज़  - लघुकथा  -मिश्रा जी की उन्नीस वर्षीय मंझली बेटी मोहल्ले की पानी की टंकी पर चढ़ गयी और शोले के…See More
2 hours ago
Samar kabeer commented on Abha saxena Doonwi's blog post ग़ज़ल: हर शख़्स ही लगा हमें तन्हा है रात को
"मुहतरमा आभा सक्सेना जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जलता दिया भी देखिये…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,शिल्प,व्याकरण,और शब्दों को बरतना अभी आपको सीखना…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post आज फिर ...
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह एक उम्द: और दिल को छू लेने वाली रचना हुई है आपकी,इस…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,बहुत दिनों बाद आपकी ग़ज़लें ओबीओ पर पढ़ने का मौक़ा मिला,कहाँ रहे भाई? दोनों…"
3 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service