For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फाइलातुन फाइलुन फऊल फेलुन 

कहँवा से आइके जगार कइल

जिनगी में साँइ से उजार कइल

जिनगी से अइसन करार कइल

सिनुरा वीरांगना पुछार कइल

पँउआ बढ़त रहल अधुना क चहला

मथवा सहलाइ होसियार कइल

पतिया पँवरि परदेस से  पहुन का

कहलस की सोलहो सिंगार कइल

सुगना पठवत विदेसिया पहुनवा

चितवा चोराइ बेकरार कइल

मनवा चहत पिय रीति मिलन करि के

सँसवा से साँस सोहनार  कइल

जिनगी  खेवात ना अँसुअन बहले 

उठि के नारी सक्ति सकार कइल

-प्रमोद श्रीवास्तव 

मौलिक और अप्रकाशित 

सोहनार -सुहावना, मनभावन  ;  जगार- जागरण ;    उजार--उजियारा;   पँवरि -तैर कर; चहला -कीचड़; पुछार -पोंछाई

Views: 698

Replies to This Discussion

आदरणीय गुरूवर सौरभ पाण्डेय जी, 

राउर सनेह सीख सुझाव क आसरा निहारत ।

प्रस्तुति के अनुमोदन के लिए सादर आभार ।

भाव पक्ष से सोझ एह गजल के शैल्पिकता प हम रउआ से सहयोग चाहब. तनिका तक्तीह कऽ के बतावल जाव जे गजल के मिसरा कइसे सर्हियावल गइल बा. तब हम एक हाली फेरु से एह प्रस्तुति प आइब. 

सादर

आदरणीय गुरूवर सौरभ पाण्डेय जी, 

क्षमा परथना कs संगे गल्ती सुधारल चाहत बानी। बह्र फइलातुन फाइलुन फऊल फेलुन/फइलुन होई। फाइलातुन  लिखा गइल रहल ह।दुसरके शेर कs पहिलके मिसरा में शब्द "अइसन"  लिखा गइल बा ऊ "अइसने" होई।

फइलातुन  फाइलुन  फऊल   फेलुन/फइलुन 

1 1 2 2     2 1 2   1 2 1    2 11/1111

कहँवा से/ आइ के/ जगार/ कइलs

जिनगी में/ साँइ से/ उजार/ कइलs

जिनगी से/ अइसने/ करार/ कइलs

सिनुरा वी/रांगना/ पुछार/ कइलs

पँउआ बढ़/त रहल अ/धुना क/ चहला

मथवा सह/लाइ हो/सियार/ कइलs

पतिया पँव/रि परदे/स से  प/हुन का

कहलस की/ सोलहो /सिंगार/ कइल s

सुगना पठ/वत विदे/सिया प/हुनवा

चितवा चो/राइ बे/करार/ कइलs

मनवा चह/त पिय री/ति मिलन/ करि के

सँसवा से/ साँस सो/हनार/  कइलs

जिनगी  खे/वात ना/ अँसुअन/ बहले 

उठि के ना/री सक्ति /सकार/ कइलs

-प्रमोद श्रीवास्तव 

सादर ।

अब बुझाइल तऽ, बाकिर रउआ वर्णिकता में छन्द आ गजल के विधान में घालमेल क रहल बानीं. कहवाँ (सही हिज्जे त ईहे होखे के चाहीं) के मात्रा ११२ ना हो के २२ होखी. असहीं जिनिगी के मात्रा ११२ ना होके २२ होखी. एही तरी, सिनुरा, पँउआ, मथवा, पतिया, कहलस, सुगना, चितवा, मनवा, सँसवा, उठि के एह सभ के मात्रा भार २२ होखी.  बहर के मात्रा-भार वाचिक परम्परा के अनुसार होला. एही वाचिक परम्परा के अनुसार भोजपुरी भासा चलेले. 

एह मंच पर गजल के लेके बहुत सुगढ़ आलेख बाड़न सऽ. रउआ से निहोरा बा, पहिले एक हाली रउआ उन्हनीं के देख जाईं. गजल के अभ्यास में आवत ढेर कठिनाई से निजात मिल जाई.. 

जै जै 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post जीवन्तता
"आपका हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी।"
15 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। मैं धन्य हो आपसे शाबाशी पाकर। बहुत शुक्रिया सर।"
16 hours ago
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"//काफ़िर नहीं शिकार किसी बद-दुआ का हूँ/      शह्र-ए-बुतां की धूल जो अब छानता हूँ…"
16 hours ago
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी

जिस रास्ते जाना नहींहर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता…See More
17 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय चंद्रेश जी।"
17 hours ago
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"गजब की रचना। बहुत-बहुत बधाई इस सृजन हेतु।"
17 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। ग़ज़ल को अपने आशीर्वाद से नवाज़ने के लिए आपका बहुत आभारी हूँ। सर,…"
17 hours ago
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani updated their profile
17 hours ago
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
18 hours ago
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
18 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post धरणी भी आखिर रोती है
"हार्दिक धन्यवाद आपका"
18 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post जीवन्तता
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब, बहुत अच्छी रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
18 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service