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आदरणीय काव्य-रसिको,

सादर अभिवादन !

 

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह आयोजन लगातार क्रम में इस बार एक सौ पन्द्रहवाँ आयोजन है.   

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ  

21 नवबर 2020 दिन शनिवार से 22 नवबर 2020 दिन रविवार तक
 
इस बार के छंद हैं - 

गीतिका छंद 

हम आयोजन के अंतरगत शास्त्रीय छन्दों के शुद्ध रूप तथा इनपर आधारित गीत तथा नवगीत जैसे प्रयोगों को भी मान दे रहे हैं. छन्दों को आधार बनाते हुए प्रदत्त चित्र पर आधारित छन्द-रचना तो करनी ही है, दिये गये चित्र को आधार बनाते हुए छंद आधारित नवगीत या गीत या अन्य गेय (मात्रिक) रचनायें भी प्रस्तुत की जा सकती हैं.

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं. 

गीतिका छंद के मूलभूत नियमों से परिचित होने के लिए यहाँ क्लिक ...

जैसा कि विदित है, अन्यान्य छन्दों के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती है.

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आयोजन सम्बन्धी नोट 

चित्र अंतर्जाल से 

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो 21 नवबर 2020 दिन शनिवार से 22 नवबर 2020 दिन रविवार तक, यानी दो दिनों के लिए, रचना-प्रस्तुति तथा टिप्पणियों के लिए खुला रहेगा.

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करेंआयोजन की रचनाओं के संकलन के प्रकाशन के पोस्ट पर प्राप्त सुझावों के अनुसार संशोधन किया जायेगा.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें। 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  8. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

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मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

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Replies to This Discussion

बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं आदरणीय।प्रेरणादायक।हार्दिक बधाई

गीतिका छ्न्द का प्रयास

प्यार से नाना चले मुझको घुमाने के लिए।
हाथ मेरा थाम वे लेते खिलौने नित नए ।
ठंड पौड़ी की भुला, आते मिठाईयाँ लिए ।
छुट्टियाँ नाना-यहाँ बीते बिना चिंता किए ।

घूम नाना साथ भोरे, भेंटती कुछ तितलियाँ ।
पुष्प नाना किस्म के औ वृक्ष सुंदर पत्तियां ।
शिष्य नाना के सभी, छूते चरण, मिलते जभी ।
गोद में मुझको झुला, देते थमा टॉफी कईं।

पूरियां पकवान से थाली सजा नानी खड़ी ।
डांट नाना को सुनाती, "देर क्यों इतनी भली ?"
"संग चेले चाँठियों के, समय की भी सुध नहीं ?
भूख से नाती मेरा, चकराए ना, दुर्बल कहीं ।"

याद वर्षों बाद आती गांव की, ननिहाल की ।
सर्दियों की धूप में उजले नदी के तीर की ।
पर्वतों पर सीढ़ियों से हरित खेतों, धान की ।
सैर नाना संग सीखीं बात धर्मोज्ञान की ।
------------------------------------------------------
मौलिक व अप्रकाशित

आ.अंकित जी , अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत सादर धन्यवाद।

आदरणीय अंकित कुमार नौटियाल जी सादर, सुन्दर प्रयास हुआ है आपका गीतिका छंदों पर.तृतीय छंद के अंतिम पंक्ति में शिल्प का पालन नहीं हुआ है. जबकि अंतिम छंद में तुक में चूक हुई है. देख लें. सादर

आदरणीय अशोक जी, त्रुटियों को उजागर करने के लिये, आपके समय व टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। मैं अवश्य ही भूल सुधारने का प्रयास, करूँगा व आगे की रचनाओं में ध्यान रखने की चेष्टा करूँगा।

पुनः हार्दिक धन्यवाद ।

आदरणीय अंकित जी बहुत सुंदर रचना है। बधाई स्वीकार करें।

गीतिका छंद

 

शेष हैं अब भी कहीं, मानव हृदय में प्यार-सा ।

चल रहा जिससे जगत, आभार-सा उपकार-सा ।

एक अपनापन कभी, लगने न देता भार-सा ।

बस यही इस वक्त है, आधार-सा आधार-सा ।।

 

नेक शैशव भी सहज, समझे जरा की आफतें ।

देखता है वो सहे, कैसी सदा ये जिल्लतें ।

क्यों हृदय से मिट रहीं, संसार में अब चाहतें ।

क्यों पनपती जा रही, अब नफरतों की आदतें ।।

 

हम बुजुर्गों को लिए, नित साथ अब आगे बढ़ें ।

दोष ही केवल न अब, हम शीश पर उनके मढ़ें ।

कर दिखाएं सच इसे, मिलकर नए सपने गढ़ें ।

धवज यही लेकर बढ़ें, तब लक्ष्य के गिरि पर चढ़ें ।।

 

मौलिक/अप्रकाशित.

 

आ. भाई अशोक जी, चित्रानुरूप अति उत्तम प्रेरणादायी छन्द रचे हैं । हार्दिक बधाई ।

प्रस्तुत छंदों की सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी. सादर

आदरणीय अशोक जी, संवेदना से भरपूर रचना।

"हम बुजुर्गों को लिए, नित साथ अब आगे बढ़ें ।
दोष ही केवल न अब, हम शीश पर उनके मढ़ें ।"

आज के समय में बहुत प्रासंगिक पंक्ति।

पूरे विश्व मे यह भाव आज फैल रहा है, की सब समस्या पूर्व की पीढ़ियों के कारण है, इससे पीढ़ियों में एक दूसरे के प्रति सहानुभूति कम हो रही है। "बूमर" और "मिलनियल" शब्द इसी असामंजस्य को बयां करते हैं। नई पीढ़ी के लिए बहुत अच्छा सन्देश ।

बधाई स्वीकार करें।

आदरणीय अंकित कुमार नौटियाल जी सादर प्रस्तुत रचना को सराहने के लिए आपका अतिशय आभार. सादर

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"आ. रिचा जी, तरही मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति, सराहना व मार्गदर्शन के लिए आभार। इंगित मिसरे को…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व सराहना व मार्गदर्शन के लिए आभार।इंगित मिसरे को बदलने…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. रचना जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई रूपम जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन ।अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई मुनीश जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत ' जी  ग़ज़ल तक आने तथा अपनी राय देने के लिए आभारी हूँ। आदरणीय…"
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