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मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ की प्रसिद्धि हिन्दी साहित्य में एक सिद्ध सूफी संत और प्रेमाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि के रूप में हैं I ‘पद्मावत’ महाकाव्य उनकी कालजयी रचना है I इसका ‘नागमती विरह-वर्णन’ आज भी हिन्दी साहित्य में अप्रतिम है I इतने उत्कृष्ट कवि का जीवन-वृत्त हिन्दी साहित्य में प्रायश: अंधकार में है I
प्रस्तुत उपन्यास का ताना-बाना बड़े शोध और परिश्रम से तैयार किया गया है I शोध की गहराई का परिचय इसी उपन्यास में उनके आलेख ‘जेइ टोवा जेहि ठावँ, मुहमद सो तैसे कहा’ से मिल जाता है I
हिन्दी साहित्य जगत में जायसी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर यह पहला उपन्यास है I इसमें शोध के साथ ही साथ कथात्मकता है, साहित्य है और इतिहास भी है I यह उपन्यास मनोरंजक होने के साथ ही साथ ज्ञानवर्धक भी है i साथ ही यह विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्य-अनुरागियों और कथाप्रेमियों आदि के लिए समान रूप से उपयोगी है I

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