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Azeem Shaikh
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  • Maharashtra
  • India
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Azeem Shaikh's Blog

मेरे चेहरे पर है जमाने के पहरे कितने

मेरे चेहरे पर है जमाने के पहरे कितने

मै हँसूंगा तो उतर जाएंगे चेहरे कितने



मेरी जफाओं का रोना रोते हो बहोत

तुम अपनी वफाओं मे ठहरे कितने



आस्मा अपनी उसत लिए ठहरा है

है समंदर तुम्हारे गहरे कितने



काम थोडा कर लेते है लेकिन

लोग सजा लेते है सहरे कितने



मोहब्बत का पैगा़म सुनाना है मुझे

देखिए तो ये लोग है बहरे कितने



ताबिर जो बतलाते है आज ख़्वाबों कि

बता नही सक्ते दरपेश है ख़तरे कितने



ये तो अपनी नज़र तय करेगी… Continue

Posted on September 25, 2016 at 11:30pm — 5 Comments

 
 
 

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