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Km. Anshu Srivastava
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Varanasi U.P.
Profession
Nursing
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Since 3 years I am writing URDU poems.

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At 10:23am on December 10, 2011, devendra upadhyay said…

Ye saari duniya kehti hai k kisi ek k jaane se zindgi ruk nahi jati..
Lekin ye koi nahi jaanta k laakhon k mil jaane se bhi uss ek ki kami poori nahi ho paati

At 4:09pm on November 21, 2011, Abhinav Arun said…

anshu ji aapka o b o par hardik swagat hai aapke aagman se yah manch sammridh hoga . aapki baat main prabandhan tak pahuncha deta hoon .thanks

At 9:33am on November 20, 2011, Admin said…

At 9:09pm on November 19, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया अंशु जी, सादर अभिवादन, यह चित्र बिलकुल यथार्थ है, "मौत का कुआँ" नामक खेल में बिलकुल ऐसा ही होता है, मैंने तो इसे अपने आँखों से देखा है, इसमें मुझे कोई trick फोटोग्राफी नहीं लगा खैर मैं बताना चाहता हूँ कि यहाँ इस चित्र का उद्देश्य केवल साहित्यकारों को एक विषय प्रदान करना है जिसपर वो काव्य सृजन कर सके | पत्र लेखन हेतु आपका आभार |   

 
 
 

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