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Anita Bhatnagar's Blog – January 2023 Archive (3)

ग़ज़ल

 

ग़ज़ल - मुहब्बत क्यूँ नहीं करते 

1222 1222

मुहब्बत क्यूँ नहीं करते,

शरारत क्यूँ नहीं करते |

बड़े ही बे - मुरव्वत हो,

अदावत क्यूँ नहीं करते ||

अलग अंदाज है उनका,

बगावत यूँ नहीं करते |

बिखर जाए अगर लाली,

वो हसरत भी नहीं करते ||

बड़े अरमान हैं मेरे,

हिफाज़त भी नहीं करते |

शिकायत लाख है उनको,

मुखालिफ वो नहीं करते ||

भरोसा तोड़ देते हैं,

इबादत…

Continue

Added by Anita Bhatnagar on January 25, 2023 at 9:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल

भाव शून्य हो अंतरपट जब,

पराधीन मन बोल रहा है |

मूक शब्द हैं शुष्क नयन पर,

द्रवित हृदय भी डोल रहा है ||

अस्त व्यस्त हैं कर्म हमारे,

बिगड़े हैं संजोग यहाँ पर |

दो दिन की है बची जिंदगी,

समय पहिया बोल रहा है ||

समय हुआ विपरीत कभी तो,

फिर कोई साथ नहीं होगा |

बढ़ते कदमों को मत रोको,

अवलोकन यूँ डोल रहा है ||

अनिता भटनागर(मौलिक व अप्रकाशित)

Added by Anita Bhatnagar on January 25, 2023 at 9:24am — 1 Comment

ग़ज़ल

122 122 122 122

जो ख्वाबों ख़यालों में खोए रहेंगे |

सहर के अँधेरे डराने लगेंगे ||1

बनोगे जो धरती के चाँद सूरज |

तो सातों फ़लक सर झुकाने लगेंगे ||2

मुहब्बत ज़माने से जो बेख़बर है |

बशर देख ताने सुनाने लगेंगे ||3

खुदा की तमन्ना जो करते चलोगे |

फ़लक के सितारे लुभाने लगेंगे ||4

हमें जिंदगी से अदावत मिली है |

इशारे हमें अब डराने लगेंगे ||5

लिखेंगे जुदाई के नगमें कभी जो |

वही तीर बन के सताने लगेंगे…

Continue

Added by Anita Bhatnagar on January 25, 2023 at 9:00am — 1 Comment

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