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मेरी कविता जलेबी नहीं है

मित्रो , कविता पढना प्रायः दुरूह कार्य है ...यह तब और कठिन हो जाता है ..जब कविता जलेबी हो हो जाती है , मेरा मतलब है , उसका अर्थ केवल ही कवि महोदय ही
explain कर सकते है ...कई मित्रो ने चाटिंग के दौरान मुझे बताया कि आप सरल रूप में लिखते है और कविता का भाव मन में घुस ... जाती है ।, आज अभी इसी के ऊपर एक कविता ....धन्यवाद

मेरी कविता कोई जलेबी नहीं है ॥

रहती है गरीबों के घर
किसानों की सुनती है यह
ये कोई हवेली नहीं है
मेरी कविता कोई जलेबी नहीं है ॥


निकलता है ,सीधा सा अर्थ
इसके भाव है , सार्थक
ये कोई पहेली नहीं है
मेरी कविता कोई जलेबी नहीं है ॥

अर्थ, पंडित तो समझेगे ही
समझ लेगें इसे अज्ञानी भी
ये रेखाओ से बनी हथेली नहीं है
मेरी कविता कोई जलेबी नहीं है ॥

हैं ये सुवासित फूल के बगीचे
जिसे मेरी कलम रोज सींचे
ये कोई झाडी , कटीली नहीं है
मेरी कविता कोई जलेबी नहीं है ॥

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Comment

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 14, 2010 at 7:54pm
बब्बन भैया आप की कविता तो रसभरी है, बस मुह मे डालो और मजा लो , बहुत बढ़िया ,
Comment by baban pandey on July 13, 2010 at 9:58pm
dhanyabad....guru jee
Comment by Rash Bihari Ravi on July 13, 2010 at 6:53pm
कबिता में बबन भाई का ,
कोई जोड़ नहीं है
ना समझ पाए कोई ,
कही यैसी मोड़ नहीं है ,
होती हैं सरल और सीधा ,
कही कोई मरोड़ नहीं हैं ,
भाई आपने सही कहा,
आपकी कविता कोई जलेबी नहीं हैं

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