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सत्य दिखता नही ,

सत्य दिखता नही ,
या सच्चाई से परहेज हैं ,
सच्चाई स्वीकारते नहीं ,
इसी बात का खेद हैं ,
सच्चाई न स्वीकारना ,
कितना महंगा पड़ता है ,
आप ही देखिये ,
महाभारत गवाह हैं ,
रामायण ही लीजिये ,
रावण की लंका जली ,
सत्य दिखा तुलसी को ,
तो तुलसी दास बने ,
सत्य दिखा बाल्मीकि को ,
तो उत्तम प्रकाश बने ,
सत्य दिखा अर्जुन को ,
कितनो का कल्याण किये ,
सत्य दिखा सिद्धार्थ को ,
तो गौतम महान बने ,
सत्य दिखा हरिश्चंद्र को ,
क्या क्या न दान दिये ,
सत्य की ही ताकत थी ,
देव खड़े थे सर झुकाए ,
तो सत्य स्वीकारिये ,
मत दीजिये कहने का मौका,
सत्य दिखता नही ,
या सच्चाई से परहेज हैं ,

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 16, 2010 at 9:54am
गुरु जी बहुत ही शानदार रचना दिया है , कभी कभी किसी के प्रभाव का ऐसी पट्टी आँखों पर पड़ जाता है कि सच्चाई नहीं स्वीकार कर पाते है लोग, कभी कभी पट्टी के ओट से दीखता भी है , तो लोग यह सोच कर आंखे बंद कर लेते है कि अब तो देर हो गई , पर नहीं जब जागो तभी सवेरा , सच्चाई के उजाले मे स्वागत है दोस्त, आंखे बंद कर लेने से रात नहीं हुआ करती, जय हो,

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