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नए वर्ष तुझ को बहुत काम करने हैं

नए वर्ष चल थाम उंगली दिखाऊँ

तुझ को  बहुत काम करने को हैं

दिये जो जख्म गत वर्ष तूने

इस साल तुझ ही को भरने को हैं

आ चल दिखाऊँ तुझे यह  स्कूल

दीवारों पे जाले हैं खाली पड़ा है

भरोसा दिलाना, घर से बुलाना  

जिम्मा तुम्हारा यह सचमुच बड़ा है

 

आ चल दिखाऊँ सड़कें वो पटरी

वीरान चक्का भोंपू  बहरा  हैं

इंजन को जंग है चालक उनींदे

महीनों से सब कुछ यहीं ठहरा है

आ चल दिखाऊँ तुझको वीरानी

वीरान झूले मंच खेल  सिनेमा

उपवन न पार्क न मेला तमाशा

कोई किसी से कुछ भी कहे न

 

आ चल सुनाऊँ तुझ को वो कहानी

दादी की गले मे जो अटकी पड़ी  है

अब के न आए नाती न पोते

किस को बुलाये  सांकल पड़ी है  

 

 थाम उंगली चल आ दिखाऊँ

बहुत काम तुझ को  करने को हैं

दिये जो जख्म गत वर्ष तूने

इस साल तुझ ही को भरने को हैं

.......................

 "मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment

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Comment by Samar kabeer on January 5, 2021 at 5:30pm

मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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