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दोस्तों के दिल में रहते हैं

हवाओ से कह दो अपनी औकात में रहे

हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं।

फिज़ाओं से कह दो अपनी हदों में रहे

हम बहारो से नहीं घटाओ से बनते है।

फूलो से कह दो कही और खिले

हम पंखुड़ी से नहीं काँटों में रहते हैं।

दुश्मनों से कह दो कही और बसे

हम कही और नहीं दोस्तों के दिल में रहते हैं।

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Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on February 10, 2012 at 12:50pm

good

Comment by sanjeev sameer on December 28, 2010 at 7:10pm

जानदार अभिव्यक्ति

सुन्दर रचना

बधाई प्रवीना जी!

Comment by praveena joshi on August 2, 2010 at 8:16pm
सबसे पहले o.b.o. परिवार को धन्यवाद मेरा इतना अच्छा स्वागत करने के लिए ,जिसकी मुझे इतनी उम्मीद नहीं थी .,यहाँ बिलकुल वैसा माहौल देखने को मिल रहा है जैसा हम परिवार में नए शिशु के जन्म लेने पर करते है.मै अपनी कविताओं में स्तर बनाये रखने कि हमेशा कोशिश करुँगी ,फिर भी यदि कोई गलती हो तो अपने परिवार के इस नये शिशु (सदस्य ) को माफ़ करेंगे ऐसी मै उम्मीद करती हू .
Comment by Kanchan Pandey on August 2, 2010 at 7:36pm
waah waah baut khub likhi hai Pravina mam,हवाओ से कह दो अपनी औकात में रहे,

हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं।bahut achhi rachna thx mam and thx OBO
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 2, 2010 at 7:26pm
बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने प्रवीना जी.....सबसे पहले HAPPY FRIENDSHIP DAY ....
बस इतना ही कहूँगा की....
हो सके तो मुझे कुछ ख़ास रखना,
दोस्ती का इतना तो एहसास रखना,
आप की दुआ से मिलेगी खुशियाँ मुझे,
ये सोच कर हर दुआ में मुझे याद रखना.....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 2, 2010 at 7:18pm
बहुत ही मखमली छुवन लिये प्यारी सी कविता , अच्छी अभिव्यक्ति, बधाई,
Comment by Rash Bihari Ravi on August 2, 2010 at 4:35pm
manmohak
Comment by Neelam Upadhyaya on August 2, 2010 at 9:50am
मित्र दिवस पर बहुत-बहुत बधाई आ हार्दिक शुभकामना । बहुत ही सुन्दर रचना है ।
Comment by Admin on August 1, 2010 at 9:56pm
आदरणीया प्रवीणा जोशी जी ,
प्रणाम ,
सर्वप्रथम मैं ओपन बुक्स ऑनलाइन के मंच पर आपकी पहली रचना का ह्रदय से स्वागत करते है, मित्र दिवस के दिन आपने बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति दी हैं,

दुश्मनों से कह दो कही और बसे
हम कही और नहीं दोस्तों के दिल में रहते हैं।


बहुत ही सुंदर पक्तिया, आगे भी आपकी रचनाओं का इन्तजार रहेगा , धन्यवाद,

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