For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आकाश के उस कोने मे जहाँ मेरी दृष्टि की सीमा है….
देखता हूँ किसी ना किसी पक्षी को नित्य ही ….
क्या यह मेरा अरमान है ?
एकाकी ही दूर तक उड़ते जाना.. सत्य की खोज मे….
क्या यह मेरे मन का भटकाव है ?

कभी उत्साह की बरसात होती है…
आशाओं का सवेरा
मन के अंधेरे को झीना कर जाता है…..
और तब दिखते हो तुम मुझे,
आनंद मे नहाए एकदम तरोताज़ा
सूरजमुखी का एक फूल…
यह नही है कोई भ्रम या भूल.

वर्जनाओं के कड़े पहरे मे
जब दीवाले कुछ मोटी होजाती है…
घर-बाहर
मन की दुनिया थोड़ी छोटी हो जाती है….
तब ना जाने क्यों
हो जाता है एक विस्फोट…
एक मुखर क्रांति -एक प्रचंड…कविता
अचानक अस्तित्व मे आ जाती है

सपने टूटते नही….
कोई महा नायक उन्हे आकर सजा लेता है
अरमानो को एक नया मज़ा देता है…..
और सीमा हीन मेरा मन
एक छोटा सा निष्पाप शिशु बन जाता है….
हँसता ,खेलता, मचलता, रूठता……
अठखेलियाँ करता…..

हे विराट !
शिशु हो तुम ?
या महानायक…..
या आनंद मे डूबे, सूरजमुखी के फूल ?
या मेरे मन के विद्रोह ?
या व्योम के रेगिस्तान मे,बिना थके……
आनंद की मृगतृष्णा मे
भटक रहे मेरे मन- बिहंग ?

क्यों छिप रहे हो …ओ मौन!
बताओ तो सही….
तुम हो कौन ?

Inspired from the bangla poem of my online daughter Sreshtha.sre... you can say it is the expansion of thoughts of her poem
डॉ.ब्रिजेश कुमार त्रिपाठी

Views: 119

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 29, 2010 at 10:34am
वर्जनाओं के कड़े पहरे मे
जब दीवाले कुछ मोटी होजाती है…
घर-बाहर
मन की दुनिया थोड़ी छोटी हो जाती है….
तब ना जाने क्यों
हो जाता है एक विस्फोट…
एक मुखर क्रांति -एक प्रचंड…कविता
अचानक अस्तित्व मे आ जाती है,

यथार्थ से परिपूर्ण अभिव्यक्ति, बहुत ही सराहनीय कविता, श्रेष्ठा श्री को भी बधाई, कुछ तो रहा होगा आप की रचना मे जिससे डॉ साहब प्रेरित हुये |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय डिंपल शर्मा जी नमस्ते उम्दा ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला बहुत ख़ूब हुआ…"
1 minute ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय निलेश "नूर" जी नमस्कार बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला क्या…"
6 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब आदाब उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई क़ुबूल फरमाएँ दुसता शैर ख़ास तौर पे…"
11 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय नाकाम जी नमस्कार बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें दूसरा और तीसरा शैर लाजवाब…"
16 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी नमस्कार  उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार…"
19 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"इक अँगूठे पर सियाही अब न आनी चाहिए इल्म की ये रौशनी घर-घर में जानी चाहिए  मुझको अपने ख़ून में…"
21 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें सभी शैर बहुत…"
31 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी प्रणाम बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  तीसरा शैर…"
33 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  सभी शैर बहुत…"
37 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय सुरेन्द्र जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें।"
37 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय उस्ताद मोहतरम समय कबीर साहब आदाब चरण स्पर्श, आशीर्वाद और कृपा दृष्टि बनाए रखें।"
39 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय मुनीश तन्हा नादौन जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला और…"
39 minutes ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service