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तलब तेरी ,इश्क तेरा ,मुहब्बत का असर तेरा .


तलब तेरी ,इश्क तेरा ,मुहब्बत का असर तेरा .

हुई मुद्दत कहा तू ने ,है सब कुछ ये सनम तेरा .

हवा तेरी महक लाये ,फिजा तेरा पता लाये ;

धनक तेरी ,उफक तेराललक तेरी अहम तेरा .

जिस्म तेरा ,अमानत है किसी का, तो रहे होकर;

सुमन तेरा ,महक तेरी , मगर ,तेरा चमन मेरा .

हमारी आस को विश्वास है तेरी मुहब्बत का ;

रहे बन के सनम मेरे ,रहूँ में ही बलम तेरा .

सुरीली तुम ही सरगम हो ,नशीली रागनी तुम हो ;

हुई हैं एक 'दो रूहें ',कहाँ बाक़ी बदन मेरा .

जगा के दीप बैठा था ,युगों से राह में तेरी ;

यह दिल तुमको समझता है ,सनम जान-ए-चमन मेरा .

दीप जीरवी

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on November 14, 2010 at 8:50am
प्रेम पगी यह रचना मन को भा गई|

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