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वो बात पूछती है अक्सर सहेलियों में

वो बात पूछती है अक्सर सहेलियों में 
क्या प्यार की लकीरें सच हैं हथेलियों में ||

आया जवाब ऐसा इजहार -ए- मुहोब्बत 
ना में जवाब ढूंढो हाँ का पहेलियों में ||

उसकी हसीन सूरत , कैसे बयाँ करूँ मै
हसीन चाँद लाखों जैसे जलें दियों में ||

गुस्ताख ये नजर भी हर सू उसे निहारे 
फूलों की शोखियों में रंगीन तितलियों में ||

नाराजगी तुम्हारी मासूमियत भरी हैं 
जैसे छुपी मुहोब्बत हो माँ की गालियों में ||

इनकार से डरूं क्या जब प्यार हो गया है 
कब से खड़ा यहाँ मै बैठा सवालियों में ||

हर दर्द हो फ़ना जब तेरे करीब आऊँ 
रौशन रहे अमावस जैसे दिवालियों में ||

नादान दिल हमारा , सुनता नहीं हमारी 
पंछी उड़े अकेला , अन्जान डालियों में ||

हर गीत या गजल की बस एक इल्तजा है 
सजती रहे जुबां पर , हो प्यार तालियों में ||......मनोज

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Comment by ram shiromani pathak on March 5, 2013 at 2:16pm

उसकी हसीन सूरत , कैसे बयाँ करूँ मै
हसीन चाँद लाखों जैसे जलें दियों में ||

गुस्ताख ये नजर भी हर सू उसे निहारे 
फूलों की शोखियों में रंगीन तितलियों में ||

नाराजगी तुम्हारी मासूमियत भरी हैं 
जैसे छुपी मुहोब्बत हो माँ की गालियों में ||

इनकार से डरूं क्या जब प्यार हो गया है 
कब से खड़ा यहाँ मै बैठा सवालियों में ||

हर दर्द हो फ़ना जब तेरे करीब आऊँ 
रौशन रहे अमावस जैसे दिवालियों में ||

आदरणीय मनोज  जी क्या कहे शब्द कम पड़ गए है .......वाह वाह .....

Comment by Shyam Narain Verma on March 5, 2013 at 12:44pm

Comment by Shyam Narain Verma on March 5, 2013 at 12:44pm

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