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माँ की भेट चढाने दो ,

मुझे सपनो में जीने दो ,
हकीकत में कुछ कर नहीं पाता ,
झूठ मूठ झुंझलाता हूँ ,
लड़ मरने की चाहत मन में हैं ,
डर के मगर भाग जाता हूँ ,
जो कर नहीं पाता जाग जाग ,
वो सोकर मैं कर जाता हूँ ,
मुझे सपनो में जीने दो ,
आज सपने में डी राजा को ,
बहुत बहुत समझाया ,
बोला अरे ओ अनाड़ी,
ये क्या कर डाला ,
अरबो की गई हिंद के प्यारे ,
तूने कितना बनाया ,
झट से बोला वो मुझसे ,
गुरु जीवन सफल बनाया ,
जो हैं बाते वो ,
अब खुल कर हो जाने दो ,
मुझे सपनो में जीने दो ,
अगले पल मुलकात हुई ,
नेता जी संग बापू थे ,
बापू की आखों में आसू ,
देख कर मैं घबरा गया ,
नेता जी पर नजर पड़ी तो ,
मेरा सर चकरा गया ,
हाथ में थी तलवार ,
और बोले बापू से ये बाणी ,
अब इन गद्दारों को ,
माँ की भेट चढाने दो ,
मुझे सपनो में जीने दो ,

Views: 398

Comment

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Comment by Rash Bihari Ravi on December 9, 2010 at 1:28pm
dhanyabad asha ji
Comment by asha pandey ojha on December 8, 2010 at 11:49pm
हाथ में थी तलवार ,
और बोले बापू से ये बाणी ,
अब इन गद्दारों को ,
माँ की भेट चढाने दो ,
bahutkhoob .. sateek .. ek peeda ... मुझे सपनो में जीने दो
Comment by Rash Bihari Ravi on December 6, 2010 at 5:40pm
dhanyabad sir ji

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 21, 2010 at 10:23am
मुझे सपनो में जीने दो ,
हकीकत में कुछ कर नहीं पाता,

सीधी बात, सटीक शब्दों मे, सुंदर रचना , बधाई गुरु जी !

कृपया ध्यान दे...

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