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अनकहा बयाँ हैं अश्क तुम्हारे
अनसुनी दास्ताँ हैं अश्क तुम्हारे

आँखों से दिखती है दुनिया बाहर की
अन्दर का जहाँ हैं अश्क तुम्हारे

दर्द हो दिल में तो ही होता दीदार इनका
ऐसा कुछ कहते कहाँ हैं अश्क तुम्हारे

मोका है आज तो जान लो तुम इन्हें
वरना हमेशा रहते कहाँ हैं अश्क तुम्हारे

शायद खुशनुमा हैं मिजाज़ इनका
साथ रहकर दर्द सहते कहाँ हैं अश्क तुम्हारे

ये ठहरी जमीं नहीं जो जीत लोगे तुम इन्हें
बहता आसमां हैं अश्क तुम्हारे

ढूंढ़ न पाया कोई मतलब इनका
कभी ना कभी हाँ हैं अश्क तुम्हारे

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