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हिंदी दिवस [दोहावली]

हिंदी मेरे हिन्द की ,संस्कृति की पहचान
मिसरी घोले कान में ,इसमें बसती जान //

संस्कृत की दिव्या सुता ,जन जन का आचार
लाकर अब व्यवहार में ,दो इसको विस्तार //


मातृभूमि की शान है ,देश का स्वाभिमान
हिंदी बिंदी मात की ,यह मेरा अभिमान //


पर्व एक हिंदी दिवस, मनालो संग प्यार
वारें इस पर जान हम ,दें सम्मान अपार //


हिंदी भाषा देश को करती है धनवान
अंग्रेजी को छोड़ कर ,इसको देना मान //

हिंदी दिन है आ गया ,ख़ुशी मनाओ यार
देव भाषा है इससे , महकाओ घर-बार //


स्नेह हिंदी भारत का ,भारत की है आस
हिंदी भाषा है मधुर सबका यह विश्वास //

हिंदी दिन की आपको ,बधाइयाँ हैं ढेर
हिंदी अपनाएं सभी अब काहे की देर //

          ...................................

..............मौलिक व अप्रकाशित ..............

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 14, 2013 at 1:39pm

दोहों के माध्यम से हिन्दी दिवस पर सुन्दर प्रयास के लिए बधाई | दोहों में गेयता बाधित हो रही है | इन्हें आप गाकर देखे 

स्वतः समझ आ जायेगी सरिता जी | हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाए 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 14, 2013 at 1:02pm

आ. सरिताजी कविता के माध्यम से हिंदी का गुणगान के लिए हार्दिक बधाई। हम सब हिंदी मे "" ही " " हस्ताक्षर करने का संकल्प      लें तो यह दिन सफल हो जाएगा।

हिंदी दिन है आ गया ,ख़ुशी मनाओ यार // हिंदी दिवस आ गया ,ख़ुशी मनाओ यार 

हिंदी अपनाओ अभी काहे की है देर // हिंदी अपनाएं सभी, अब काहे की देर 

Comment by Parveen Malik on September 14, 2013 at 11:57am
हिंदी हमारी पहचान है
हिंदी हमारा स्वाभिमान है
हमें हिंदी को अपने व्यवहार में अपनाना चाहिए न सिर्फ हिंदी दिवस के दिन बल्की हर रोज .... बधाई !

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