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तुम्हारी याद में.........

तुम्हारी याद में.........

अनमोल मोहब्बत जब रुसवा होती है
उर के बेदर्द खौफ से जिंदगी जुदा होती है
मौत से भी गहरी जिंदगी हो जाती है 
जब वफ़ा बेवफा हो जाती है 
दिशा देना चाहता हूँ आज मै जिंदगी को, 
भूला नहीं पाता हूँ कुछ की तेरी बंदगी को,
इस पल याद करता हूँ मै बीते उस पल को,
आपके आस्तित्व से धड़कते हुए उस दिल को,
तुम मुझमे आज भी ज़िंदा हो छोड़ तुम मुझे दिए तो क्या,
जिंदगी रोज़ खफा होती है नहीं बस आती मौत तो करे क्या,
धड़कने दिल की जब हो जाती है तेज बीते लम्हों का पल कुछ खास हो,
शायद उसे एह एहसास होता है तुम यही हो यही कही आस पास हो,
हर चीज़ की कीमत होती है, कुछ मिलता नहीं खैरात
मै ठहरा गरीब प्रीत की बोली न लगा पाया,
यारो इस प्रेम जगत में,सच्चे प्रीत की नहीं औकात,
जिनके कदमो में है दौलत उसे ही मिलाती ऐ सौगात,
"अभिराजअभी"

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 26, 2011 at 10:44am
भाव प्रधान रचना है , संयोजन में कसाव की जरूरत , धन्यवाद बंधू |

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