For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रिय ,अभी
वक्त कैसे बीत रहा हैं अब आप को क्या बताऊँ हर तरफ तुम्हारी ही यादें है .हर तरफ हर जगह तुम्ही दिख रहे हो .. तुम्हारी ओ मुस्कुराहट.. तुम्हारी आहट बन कर सताती है.......तुम्हें देखने की जो ललक  तब थी.. ओ आज भी  वैसी ही है ....अफ़सोस की तुम्हें न देख  पाने  की वजह से  मेरे नैनो की प्यास बढ़ती जा रही है ..तुम्हारी ओ नज़रे मुझे .उस अथाह प्रेम की याद दिलाती है . तुम्हारा प्रेम गुलाबी रंग रोशनी बन कर, हर समय  मेरी आखों को चकाचौंध कर देता है .....सुबह उठें तो तुम.. दोपहर में देखें तो तुम ..शाम में तुम . और रात को भी तुम्ही तुम.. कैसे कट रहा है एक एक पल..तुम्हारे बिन.. पर तुम्हे क्या मालुम ..अगर पता भी हो तो तुम कर ही क्या कर सकते हो ... क्योंकि प्यार से बड़ा आप के लिए कुछ और ही था ....जिसे पाने के लिए आप ने प्यार को कुर्बानी का नाम दे दिया ...   प्यार को तोड़ने के लिए आप ने बेहद समझ बुझ के कदम उठाया.....उस तोड़ मरोड़ के मेरे बुरे वक्त में आप ने जो घाव  मेरे ह्रदय को दिया है क्या वह  कभी  ठीक हो  पायेगा ...मै जब-जब उन घाओं  पर तुम्हारी यादों का मरहम लगाना चाहता हूँ ..... तब-तब मरहम लगाना भूल तुम्हारे प्यार के अतीत में खो जाता हूँ .....मै बहुत चाहता हूँ की ओ सब  कुछ  मै लिख डालूं ..जो गुज़रा वो सब बयान कर दूं.. ....पर हो नहीं पाता जब कुछ लिखने बैठता हूँ तो तुम्हारी याद आ जाती है...और सब कुछ थम जाता है सिर्फ आप ही आप रह जाते हो..  अब तो आपने मुझसे बहुत बड़ी दुरी बाना लिए हो ..दूरी संकोच की डोरी होती है ... संकोच से मन की बात नहीं होती ...और जब मन की बात ही न हो तो प्रेम वहां छुप जाता है  ..  कभी-कभी सोचता हूँ की आप को फिर वैसा ही ख़त लिखूं जो पहली बार मै लिका था. और आप उसे पाने को उतने ही बेकरार थे फिर सोचने लगता हूँ .क्या आप की बेकरारी फिर वही होगी..नहीं अब शायद नहीं होगी..      शायद अब मेरे उस प्रेम की जगह जलन हो  ..एक दर्द  हो जिससे आप छुटकारा पाना चाहोगे  ....जो टीस बन कर आप को सताता हो..यही डर मन को सताने लगता है..........

मै आप से एक वादा करता हूँ की आप को कभी भी अपनी वजह से  कोई परेसानी नहीं आने दूंगा मै आप के  गृहस्ती  को  खँडहर  कर करके उस पर मै  अपने प्यार की नीव  वापस कभी रखना नहीं चाहूँगा .......मै हमेशा अपने प्यार को...... मै मेरे दिल में ज़िंदा रखूंगा और आप को याद करता रहूंगा .....आप के प्यार की याद ही अब मेरी  वसीहत  है जिसे मै हमेशा अपने आखिरी वक्त तक  सम्भाल कर रखूंगा...

तुम्हारा

 राज...........................

Views: 363

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service