For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पहेली दिल की सुलझाऊँ तो कैसे
मैं इससे हार भी जाऊं तो कैसे।

लिपट जातें हैं पावों से बगूले
मैं बाहर दश्त से आऊँ तो कैसे।

पुकारे आसमां बाहें पसारे
परों बिन पास मैं जाऊं तो कैसे ।

धड़कता है वो दिल में दर्द बनकर
मैं उसको भूल भी जाऊं तो कैसे ।

गुलो पर बूँद मैं शबनम की बनके
हवा में फिर से घुल जाऊं तो कैसे।

उमड़ती ज़ह्ण में ख़्वाबों की नदियां
समन्दर मुट्ठी में लाऊँ तो कैसे

बदन पर पैरहन यादों का तेरा
नज़र आईने को आऊँ तो कैसे।

जवानी लौट के आये न फिर से
कि सहरा में नदी लाऊँ तो कैसे

मैं गुड़िया मोम की सीमा वो पत्थर
उसे जलकर भी पिंघलाऊं तो कैसे ।

मौलिक और अप्रकाशित

सीमा शर्मा मेरठी

Views: 348

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सीमा शर्मा मेरठी on December 30, 2015 at 12:07pm
आशुतोष साहेब तहे दिल से शुक्रिया
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 30, 2015 at 12:00pm

बहुत खूब हार्दिक बधाई .

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 30, 2015 at 10:35am

आदरणीया सीमा जी ..आपकी दूसरी रचना पढने का मौका मिला ...दिल में उठते भावों का सजीव चित्रण करती इस शानदार शसक्त ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई एवं नव बर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Nema is now a member of Open Books Online
27 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post छत पे आने की कहो- ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता…"
35 minutes ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-111

आदरणीय काव्य-रसिको,सादर अभिवादन ! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह आयोजन लगातार क्रम में इस…See More
37 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आ. भाई सतविन्द्र जी, गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
58 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"आद0 रूपम कुमार जी सादर अभिवादन ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार कीजिये। आद0 रवि भसीन साहिब की…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( उकता गया हूँ इनसे मेरे यार कम करो....)
"आद0 सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन आपके हवाले से एक बेहतरीन मुरस्सा ग़ज़ल पढ़ने को मिली। शैर दर शैर बधाई…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया का हृदयतल से अभिनन्दन और आभार।…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"आद0 चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन, आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक है। आभार निवेदित करता हूँ। सादर"
1 hour ago
Neelam Dixit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"हार्दिक आभार आदरणीय सतविंद्र जी।"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post किसे आवाज़ दूँ (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, आदाब। ग़ज़ल पर आप की हाज़िरी और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बहुत शुक्रिया हुज़ूर!"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post किसे आवाज़ दूँ (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, ग़ज़ल को पसंद करने के लिए, हौसला बढ़ाने के लिए, और आपके…"
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आभार आदरणीय सतविंदर भाई।"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service