For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैले-कुचले कपड़ो में सड़के के किनारे प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी,उसे तो समझ में भी नहीं आ रहा था कि उसके शरीर में परिर्वतन क्‍यों आया, क्‍यों हो रही है ये पीड़ा उसे,क्‍यों बढ़ा है उसके उदर आकार, मगर प्रकृति ने जो मानव जीवन के नियम बना दिये जो क्रिया बना दिया वह होगा जाने या अंजाने, अमीर या गरीब, मानसिक परिपक्‍त या अर्ध विक्षिप्‍त , तभी एक जीव उसके शरीर से बाहर आया एक उसी के तरह के उस छोटे जीव को देख कर आश्‍चर्य चकित रह गयी। उसे क्या पता था कि समाज में कुछ ऐसे भी भेड़िये है जो मरे हुए को भी मार देते है, दिन के उजाले में दूर भगाते है और रात के अँधेरे में पाते ही नोच कर छोड़ देते है मरने के लिए वह पगली उस अजीबो गरीब हालत में माँस के लोथड़ो से सना देख पास के नल से नहला कर साफ किया। पैदाइसी चिन्‍ह को नोच कर मिटाया। तब तक शायद प्रकृति को उस पर थोड़ी थी दया आयी और उसने उसे थोड़ा विवेक प्रदान किया , वह रोते बिलखते उस जीव को लेकर भटकती हुई एक अस्‍पताल तक जा पहुँची, जहाँ उसे इस कदर गोद में बालक और बालक की दशा देखकर डाक्‍टर भागे आये '' देखो वह पगली गोद में कैसा और किसका बच्‍चा लिये लगता है कही से चुरा कर भागी है। सभी उसकी तरफ दौडे और उसे देखकर नहीं सर ''ये बच्‍चा लगाता है इसी का है इसकी हालत तो देखो '' सभी ने उस पागल को उपर से नीचे तक देखा सभी को सच्‍चाई को समझ गये तभी धीरे से जाँच करने वाले कम्‍पाउन्‍डर ने कहा कि सर '' यह बच्‍चा तो मर गया है'' सभी परेशान की कैसे उस पगली से बच्‍चे को अलग किया जाये। वह पगली शायद उन की बात को समझ चुकी थी कि उसका, वह रोता हुआ बालक शांत क्‍यो हो चुका था , वह बच्‍चा संसार में जैसे चुपके से आया वैसे संसार से चुपके से विदा हो चुका था वह पगली गोद में बच्‍चे को छुपाये चल पड़ी एक अंजान रास्‍ते की तरफ।

मौलिक एवं अप्रकाशित, अखंड गहमरी

Views: 594

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Akhand Gahmari on May 26, 2016 at 10:45am
Comment by kanta roy on May 25, 2016 at 9:40am

    सामाजिक विभत्सता की  चरम सीमा  है  ये  , मानवीय मूल्यों  की कीमत  सिर्फ उजालों  में  तय  की  जाती  है ,रात  के  अँधेरे  में  समस्त  मानव  यकाएक भेड़िये की शक्ल  अख्तियार  कर  लेते  है .  कहाँ  है  बालिका  संरक्षण  गृह  ?  कहाँ   है  बाल -सुधार  केंद्र ?  कहाँ  है  वो  सभी  सेवा  इकाइयां  जिन्हें  एन जी ओ नाम  से  संबोधन  करती  है  सरकार ,जिनको  करोडो मिलते  है  इन्हीं अनाथ ,बेआसरा ,मजबूरों  के  लिए  ? अगर  इनका  कोई  आस्त्तित्व  है  तो  फिर  हमें  ये  लोग  आते -जाते  सडकों  पर  युहीं  कही  क्यों  मिल जाते  है ? क्या  वो  सभी  अनुदान  -प्रतिदान की  गाथाएँ कागजी  जहाज  है  जिन्हें  हम  कागजों  में  रोज खजानो  से  लदते देखते  है . 

मन  को  आंदोलित  करने  वाली  बहुत  ही  सार्थक  लघुकथा  लिखी  है  आपने  आदरणीय अखंड जी ,बधाई  स्वीकार  कीजिएगा  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
18 hours ago
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
19 hours ago
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service