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मैं कौन हूँ ?

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कलम हूँ, इसलिए लिखता हूँ ,
कागज हूँ, इसलिए पढ़ा जाता हूँ |

कथा हूँ, इसलिए कहा जाता हूँ,
व्यथा हूँ, इसलिए सुना जाता हूँ |

काव्य हूँ, इसलिए भव्य हूँ
शांत हूँ, इसलिए द्रव्य हूँ |

हार हूँ, इसलिए प्रहार हूँ ,
जीत हूँ, इसलिए त्यौहार हूँ |

मृत हूँ, इसलिए अमृत हूँ,
जीवन हूँ, इसलिए सृष्ट हूँ |

शौर्य हूँ, इसलिए प्रकाश हूँ,
चंद्र हूँ, इसलिए आकाश हूँ |

भाव हूँ, इसलिए प्रभाव हूँ,
संयम हूँ, इसलिए अभाव हूँ |

युवा हूँ, इसलिए जुआ हूँ,
गहरा हूँ, इसलिए कुआं हूँ |

पुष्प हूँ, इसलिए उपहार हूँ,
अर्चन हूँ इसलिए कुमार हूँ |

आकार हूँ, इसलिए विकार हूँ,
साकार हूँ, इसलिए साहित्यकार हूँ |

प्रेम नमन :- के.कुमार 'अभिषेक'
( मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by K.Kumar on December 31, 2017 at 9:19am

शुभ नमन । आदरणीय Mohammed Arif जी ! हृदय से आभार और नववर्ष की अग्रिम आनंदकामनाये ।

Comment by Mohammed Arif on December 31, 2017 at 7:38am

आदरणीय के. कुमार जी आदाब,

                               बहुत ही सुंदर  अससास से भरपूर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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