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हमारी सोच का पंछी अभी उड़ान मे है
ज़ॅमी से दूर बहुत दूर  आसमान मे है

न कल के ख्वाब न पुरखों की आनबान मे है
तेरा वजूद अगर है तो वर्तमान मे है .....

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Comment by fauzan on September 8, 2011 at 12:50pm

Arun Bhai.........Venus Bhai,,,,,bahut Shukria.......himmatafzai ke liye.

Comment by Abhinav Arun on September 7, 2011 at 7:47am

न कल के ख्वाब न पुरखों की आनबान मे है
तेरा वजूद अगर है तो वर्तमान मे है .....

वाह बहुत असर दार

हजारों पर भारी इन दो शेरों का वार

वाह

वाह वाह !!!

badhai !!

Comment by वीनस केसरी on September 7, 2011 at 12:37am

वर्तमान शब्द कि ऐसी काफिया बंदी हुई है कि दिल बाग-बाग हो गया

 

सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई

 

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