For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sheikh Shahzad Usmani's Discussions (5,135)

Discussions Replied To (4469) Replies Latest Activity

"वाह। जो कुछ भी किया जाये बेहतर, किया जाये दिल से। बेहतरीन प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधा…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आपकी इस दूसरी बेहतरीन रचना से भी हम लाभान्वित हुए। हार्दिक बधाई और शुक्रिया जनाब जवा…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। आयोजन की एक और बेहतरीन रचना।  तेरे-मेरे दिल की ज़रूरतें, सीमाएं, दायित्व सब कुछ…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। विषयांतर्गत जब दिल की बात होगी, तो दिल्लगी और शौक की भी। बेहतरीन भावपूर्ण रचना…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। बेहतरीन समापन पंक्तियों के साथ कड़वी सच्चाई बयां करती विषयांतर्गत आज की  एक और…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। बहुतों के सच्चे साथी काग़ज़, कलम और साहित्य-कला! कागजों से दोस्ती की जाए भावनाओं…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। बेहतरीन सारगर्भित। जो महब्ब्त की राह से मिलता वो निकलता है़ रास्ता दिल से डूब…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। वाह। बचपन की आइस पाइस छिपन छिपाई तो दिल से याद आ ही गई, लेकिन इस सदी में  भी स…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। एक ग़ज़ल में बाख़ूबी जीवन में सभी तरह की शख्सियतों से दिल के हालात और दिलों के रि…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदाब। गागर में भाव-सागर। ये भी एक ज़रूरी पक्ष है विषयांतर्गत। हार्दिक बधाई आदरणीय जवा…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Feb 10, 2019 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100

1202 Feb 12, 2019
Reply by मिथिलेश वामनकर

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
10 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service