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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions (3,041)

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"आ० अखिलेश भाई - बहुत बहुत आभार"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Nov 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-61

567 Nov 14, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"     उत्सव सभी को चिंता थी समय से कार्यालय पहुँच जाएँ अभी ट्रेन थी मंजिल पहुंचकर भी…"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Nov 14, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-61

567 Nov 14, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"दो चार हमारे  भी गर अपने नही  होते तो हैं रहते जिसमे घर अपने नहीं होते मस्त हजारों…"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आ० सौरभ जी , आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रया  से हम प्रेरणा ग्रहण करते हैं . आप भी हमारे…"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 18, 2015 to ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या /काव्य गोष्ठी माह अक्टूबर 2015 पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट

2 Oct 18, 2015
Reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

"aa0 aashutosh jee  sadar aabhar"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 13, 2015 to ब्रह्माण्ड में क्या हम अकेले हैं ? -डा0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव

2 Oct 13, 2015
Reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

"आ० सौरभ जी आन फानन में नन्दन कानन  .  आपका दोहा - अबकी फिर माँ के लिए ’फले पूत’ वरदा…"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-60

280 Oct 11, 2015
Reply by नादिर ख़ान

"बस दूर कहीं क्षितिज पर उम्मीद अपनी जीत पर मुस्कुराती है---- वह वाह सरना जी , बहुत बढ़…"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-60

280 Oct 11, 2015
Reply by नादिर ख़ान

"सचिन जी  अपने बढ़िया दोहे रचे , कुछ श्रम और करते तो बेहतर परिणाम आता ."

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-60

280 Oct 11, 2015
Reply by नादिर ख़ान

"आ० विजय सर   !   गरीब को दिन फिरने की आस है ,उन्हें गरीब से कितनी आस है---- दो पंक्त…"

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-60

280 Oct 11, 2015
Reply by नादिर ख़ान

"आ० वैशाली जी  आपकी रचना से क्या आस और उम्मीद लगाऊं . सादर ."

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied Oct 9, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-60

280 Oct 11, 2015
Reply by नादिर ख़ान

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दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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