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Sheikh Shahzad Usmani's Discussions (5,135)

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"इतनी प्यारी रचना से एक अहम विरासत के महत्व और उसके दायित्वपूर्ण कर्मठ हस्तांतरण परम्…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"ऐसा तो सोचा भी न था कि एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने वाला माहिर इतनी सशक्त और असरदार मार्मिक…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"आदाब। वरिष्ठजन की टिप्पणियां हमारी इस्लाह कर रही हैं। हार्दिक बधाई इस बढ़िया रचना हे…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"जीवन संगिनी और सहोदरों के प्रतीकों में मन की बात कहती बहुत बढ़िया शब्द-शिल्पयुक्त रच…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"प्रदत्त विषय पर सम्पूर्ण अभिव्यक्ति। बहुत बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता ग…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"आदाब। सार्थक सोद्देश्यपूर्ण बेहतरीन दोहा-छंदों से हिदायत, नसीहत देती पेशकश हेतु हार्…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
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""आवाज़ की परवाज़" (छंदमुक्त कविता) : ------------------------------------------------…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
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"बेहतरीन शब्द-शिल्प में बढ़िया हरिगीतिका छंदयुक्त रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय अजय…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"वाह। गागर में सागर। सागर में बोलते मोती! 'विरासत' के सभी आयाम छूती और बाख़ूबी परिभाष…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
Reply by Samar kabeer

"आदाब। हर भावुक/संवेदनशील साहित्य प्रेमी पाठक को उसकी मां/दादी मां/नानी मां/दाई मां/.…"

Sheikh Shahzad Usmani replied Oct 13, 2018 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

183 Oct 13, 2018
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आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
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Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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Sushil Sarna posted a blog post

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"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
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