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kanta roy's Discussions (2,219)

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"हमारे मन की कोमलता ही वजनी बना जाती बातों को , नहीं तो बातों में तो कोई बात नहीं होत…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"चमचे नेता को बैठाकर , रहे तुला में तोल। दूजे पलड़े(पल्ले) में सिक्के रख , लगा रहे है…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"गजब है यह गजल का अंदाज़ यह भी .... बडी रूआबी बात कर गये बडे ही अंदाज़ से । पता चल जा…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"साथ में रखते हो अपना ईमान ....... बहुत बडी बात कह दी आपने अपनी इस रचना में .... रचना…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"मन दंग हो उठा है यह छंद देखकर .... चकित हूँ शब्दों के संयोजन से .. चकित हूँ भावों की…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

"वाह !!! बहुत ही सुंदर वचनों से ओत प्रोत कविता का आगाज हुआ है । बधाई आपको आदरणीय अखिल…"

kanta roy replied Jul 10, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महाउत्सव" अंक-57

696 Jul 11, 2015
Reply by Satyanarayan Singh

सदस्य कार्यकारिणी

"बहुत ही सुंदर और उपयोगी पोस्ट किये है आपने आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी । इस समस्या से न…"

kanta roy replied Jul 7, 2015 to ओबीओ लाइव आयोजनों में डेस्कटॉप और मोबाइल वर्जन से सहभागिता को कैसे सहज किया जा सकता है?

18 Jan 21, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"इस आयोजन के वक्त फोन ने बडी़ ही उठा पटक मचा रखी थी । सारे गजल पढी दिल ही दिल में शाय…"

kanta roy replied Jul 7, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 60 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

8 Jan 25, 2016
Reply by Rana Pratap Singh

"वाह !!! एक और नया आगाज़ हुआ है । बधाई ओबीओ परिवार को उसके विस्तार के लिए और ढेरों बध…"

kanta roy replied Jul 7, 2015 to ‘ओपन बुक्स ऑनलाइन’ हल्द्वानी चैप्टर का शुभारम्भ : रिपोर्ताज़

8 Jul 7, 2015
Reply by Dr.Prachi Singh

"जन्मदिन की हार्दिक शुभ कामनाएँ आदरणीय डा. विजय शंकर जी ।"

kanta roy replied Jul 1, 2015 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

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दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
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Sushil Sarna posted blog posts
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